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निधि

मनुष्य के भीतर बचा हुआ वह अंतिम प्रकाश
अम्बुज
Type: Print Book
Genre: Poetry
Language: Hindi
Price: ₹203 + shipping
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Description

जब जीवन की आपाधापी आत्मा की आवाज़ को दबाने लगती है, जब संवेदनाएँ बोझ और करुणा कमज़ोरी प्रतीत होने लगती है—तभी जन्म लेती है यह कृति, “निधि”। यह मात्र एक कहानी नहीं, बल्कि मानवीय चेतना की गहन यात्रा है—उन भावों की, जिन्हें हम जीते तो हैं, पर शब्दों में स्वीकार करने का साहस नहीं जुटा पाते।

“निधि” उस आत्मिक शक्ति का प्रतीक है, जो टूटकर भी किसी और का सहारा बनती है; जो स्वयं के अंधेरों में जलते हुए भी दूसरों के लिए प्रकाश का स्रोत बनी रहती है। यह पुस्तक करुणा, त्याग, धैर्य और प्रेम के उन सूक्ष्म आयामों को स्पर्श करती है, जहाँ मनुष्य केवल “अस्तित्व” नहीं, बल्कि “अर्थ” जीने लगता है।

इस कृति के प्रत्येक पृष्ठ पर जीवन की वास्तविकता धड़कती है—दर्द के साथ उसकी गरिमा, संघर्ष के साथ उसका सौन्दर्य, और निराशा के बीच आशा का कोमल प्रकाश। यह पुस्तक आपको भावुक करने के लिए नहीं, बल्कि आपके भीतर सोई हुई संवेदनशीलता को जगाने के लिए लिखी गई है; आपको यह याद दिलाने के लिए कि करुणा कोई दार्शनिक कल्पना नहीं—वह मनुष्य होने का सच्चा प्रमाण है।

यदि आप अपने भीतर के उस शांत, उज्ज्वल और जीवित हिस्से से मिलना चाहते हैं,
यदि आप यह जानना चाहते हैं कि संवेदनशील रहना हार नहीं, बल्कि सर्वोच्च साहस है—
तो “निधि” आपकी आत्मिक यात्रा की सच्ची साथी बनेगी।

यह पुस्तक केवल पढ़ी नहीं जाती…
महसूस की जाती है।

About the Author

इस कृति के रचयिता एक संवेदनशील और अंतर्मुखी साहित्य साधक हैं, जो लेखन को केवल शब्दों का अभ्यास नहीं, बल्कि आत्मा की एक गहरी आध्यात्मिक यात्रा मानते हैं। उनका विश्वास है कि सच्चा साहित्य वही है, जो पाठक के भीतर उस मौन भाव को जगाए, जिसे वह स्वयं महसूस तो करता है पर अभिव्यक्त नहीं कर पाता। उनके लेखन में करुणा, धैर्य, मानवीयता और जीवन दर्शन की गहन छाया स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

लेखक की रचनाएँ मनुष्य की अंतःचेतना को स्पर्श करने का प्रयास करती हैं। वे जीवन के संघर्षों को केवल पीड़ा के रूप में नहीं, बल्कि आत्म-विकास और आंतरिक प्रकाश की ओर बढ़ने के अवसर के रूप में देखते हैं। शायद इसी कारण उनकी लेखनी में कहीं गहरी शांति है, कहीं करुणा का स्पर्श, और कहीं दृढ़ता की उजली लौ।

विचारशील, संयमी और परिपक्व दृष्टि रखने वाले लेखक का साहित्य के प्रति यही संकल्प है कि शब्द केवल पढ़े न जाएँ—बल्कि जीए जाएँ; वे केवल अर्थ न बनें, भाव बनें; और जहाँ संभव हो, किसी थके हुए मन के लिए आशा की एक छोटी-सी किरण बन सकें। “निधि” इसी संवेदनशील दृष्टि, मानवीय करुणा और अंतर्मन की गहरी अनुभूति से उपजी हुई रचना है।

Book Details

Publisher: Self Published
Number of Pages: 124
Dimensions: 6"x9"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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