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जब जीवन की आपाधापी आत्मा की आवाज़ को दबाने लगती है, जब संवेदनाएँ बोझ और करुणा कमज़ोरी प्रतीत होने लगती है—तभी जन्म लेती है यह कृति, “निधि”। यह मात्र एक कहानी नहीं, बल्कि मानवीय चेतना की गहन यात्रा है—उन भावों की, जिन्हें हम जीते तो हैं, पर शब्दों में स्वीकार करने का साहस नहीं जुटा पाते।
“निधि” उस आत्मिक शक्ति का प्रतीक है, जो टूटकर भी किसी और का सहारा बनती है; जो स्वयं के अंधेरों में जलते हुए भी दूसरों के लिए प्रकाश का स्रोत बनी रहती है। यह पुस्तक करुणा, त्याग, धैर्य और प्रेम के उन सूक्ष्म आयामों को स्पर्श करती है, जहाँ मनुष्य केवल “अस्तित्व” नहीं, बल्कि “अर्थ” जीने लगता है।
इस कृति के प्रत्येक पृष्ठ पर जीवन की वास्तविकता धड़कती है—दर्द के साथ उसकी गरिमा, संघर्ष के साथ उसका सौन्दर्य, और निराशा के बीच आशा का कोमल प्रकाश। यह पुस्तक आपको भावुक करने के लिए नहीं, बल्कि आपके भीतर सोई हुई संवेदनशीलता को जगाने के लिए लिखी गई है; आपको यह याद दिलाने के लिए कि करुणा कोई दार्शनिक कल्पना नहीं—वह मनुष्य होने का सच्चा प्रमाण है।
यदि आप अपने भीतर के उस शांत, उज्ज्वल और जीवित हिस्से से मिलना चाहते हैं,
यदि आप यह जानना चाहते हैं कि संवेदनशील रहना हार नहीं, बल्कि सर्वोच्च साहस है—
तो “निधि” आपकी आत्मिक यात्रा की सच्ची साथी बनेगी।
यह पुस्तक केवल पढ़ी नहीं जाती…
महसूस की जाती है।
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