You can access the distribution details by navigating to My Print Books(POD) > Distribution
भारत की पावन भूमि युग-युग से ऐसे महापुरुषों की जन्मस्थली रही है, जिन्होंने अपने त्याग, तपस्या, सेवा और अदम्य संकल्प से न केवल अपने समय को दिशा दी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का अमिट स्रोत बने। इन्हीं महान आत्माओं को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान “भारत रत्न” प्रदान किया जाता है। यह सम्मान केवल किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत उपलब्धियों की स्वीकृति नहीं है, बल्कि उनके द्वारा राष्ट्र, समाज और मानवता के कल्याण के लिए किए गए निस्वार्थ कार्यों का सामूहिक अभिनंदन है।
“निस्वार्थी: भारत के भारत रत्न दर्शन” शीर्षक यह संकलन उन विभूतियों को समर्पित है, जिन्होंने राजनीति, स्वतंत्रता संग्राम, साहित्य, विज्ञान, शिक्षा, कृषि, समाज-सुधार, कला, संगीत और अध्यात्म जैसे विविध क्षेत्रों में अपने अद्वितीय योगदान से भारत को गौरवांवित किया। इन महापुरुषों का जीवन केवल इतिहास की घटनाओं का क्रम नहीं, बल्कि संघर्ष, साधना, सेवा और समर्पण की ऐसी प्रेरक गाथा है, जो हर युग के मनुष्य को अपने कर्तव्य-पथ पर आगे बढ़ने का साहस प्रदान करती है।
इस ग्रंथ में संकलित रचनाएँ इन भारत रत्न विभूतियों के जीवन-प्रसंगों, विचारों, आदर्शों और राष्ट्र के प्रति उनके अनन्य प्रेम को काव्यात्मक एवं भावात्मक रूप में प्रस्तुत करती हैं। प्रत्येक रचना पाठक को यह अनुभूति कराती है कि सच्ची महानता पद, प्रतिष्ठा या सत्ता में नहीं, बल्कि निस्वार्थ कर्म, जनसेवा और मानवता के प्रति करुणा में निहित होती है।
इन महापुरुषों ने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी यदि लक्ष्य राष्ट्रहित और मानव-कल्याण हो, तो साधारण व्यक्ति भी असाधारण बन सकता है। उनका त्याग, उनका साहस, उनकी दूरदृष्टि और उनका नैतिक बल आज के युग में भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना उनके समय में था।
यह संकलन पाठकों के हृदय में देशप्रेम, कर्तव्यनिष्ठा, सामाजिक उत्तरदायित्व और मानवीय मूल्यों की भावना को जाग्रत करने का एक विनम्र प्रयास है। हमें आशा है कि यह कृति न केवल जानकारी प्रदान करेगी, बल्कि युवाओं को प्रेरित करेगी कि वे इन महान विभूतियों के आदर्शों को अपने जीवन में उतारकर राष्ट्र-निर्माण के पथ पर अग्रसर हों।
इन्हीं भावनाओं के साथ यह ग्रंथ समस्त पाठकवर्ग को समर्पित है, ताकि भारत रत्नों का जीवन-दर्शन हमारे चिंतन, आचरण और संकल्प का मार्गदर्शक बन सके और हम सब उनके आदर्शों को आत्मसात कर एक सशक्त, समरस और उज्ज्वल भारत के निर्माण में सहभागी बन सकें।
Currently there are no reviews available for this book.
Be the first one to write a review for the book निस्वार्थी भारत के भारत रत्न दर्शन.