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लेखक की बात – इं. उपेन्द्र नाथ
"ब्रह्म संवाद" कोई साधारण पुस्तक नहीं है — यह एक यात्रा है।
एक ऐसी यात्रा जो विज्ञान की सबसे सूक्ष्म इकाइयों से प्रारंभ होती है, और ब्रह्म की सबसे विराट चेतना तक पहुँचती है।
मैंने इस ग्रंथ को न लेखक बनकर लिखा है, न वैज्ञानिक बनकर,
बल्कि एक जिज्ञासु seeker बनकर —
जो प्रश्न करता है, जो मौन को सुनता है, जो शिव के शून्य और विष्णु की गति के बीच की कंपन को अनुभव करना चाहता है।
इस पुस्तक में विज्ञान और अध्यात्म कोई दो अलग धाराएँ नहीं हैं —
बल्कि एक ही ज्ञान-सरोवर की दो लहरें हैं।
Dark Matter हो या डार्क एनर्जी, ब्रह्माण्डीय कर्व हो या शेषनाग का विस्तार —
हर वैज्ञनिक अवधारणा में कहीं न कहीं हमारी ऋषि परंपरा की गूँज मिलती है।
मैं जानता हूँ, आज का युवा उत्तर चाहता है — अंधभक्ति नहीं।
इसलिए इस पुस्तक में कहीं भी आपको चमत्कार नहीं मिलेगा, परंतु हर पृष्ठ पर आपको चेतना की झलक अवश्य मिलेगी।
मैं चाहता हूँ कि यह संवाद पढ़ते हुए पाठक अपने भीतर की मौनता से जुड़ें, और अपनी चेतना को विज्ञान, दर्शन और भक्ति के समुच्चय से नया दृष्टिकोण दें।
यदि इस पुस्तक ने आपके भीतर एक भी नया प्रश्न खड़ा किया,
तो समझिए संवाद सफल रहा।
— इं. उपेन्द्र नाथ
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