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अर्पिता : एक देवदासी (शोषण से संघर्ष तक)

(शोषण से संघर्ष तक)
एडवोकेट नवल किशोर सोनी
Type: Print Book
Genre: Literature & Fiction, Romance
Language: Hindi
Price: ₹999 + shipping
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Description

मानव समाज को विकसित, प्रगतिशील और मानवीय मूल्यों से परिपूर्ण कहा जाता है। लेकिन जब हम अपने अतीत और वर्तमान के कुछ अंधेरे कोनों में झांकते हैं तो कई ऐसे स्याह सच सामने आते हैं जो इस सभ्यता के चेहरे पर धब्बे बनकर उभरते हैं। देवदासी प्रथा भी ऐसा ही एक सच है । एक ऐसी कुप्रथा जो सदियों से स्त्रियों की स्वतंत्रता, गरिमा और इंसानियत का हनन करती आ रही है। छठवीं शताब्दी में शुरू हुई यह प्रथा आज इक्कीसवीं सदी के विज्ञान और तकनीक से समृद्ध युग में भी तमिलनाडु,कर्नाटक,आंध्र प्रदेश,महाराष्ट्र और उड़ीसा जैसे राज्यों में किसी न किसी रूप में जीवित है । यह वह कुप्रथा है जिसमें एक बच्ची को,एक किशोरी को धर्म और भक्ति के नाम पर देवता से विवाह के बहाने मंदिरों को दान कर दिया जाता है फिर वह लड़की न समाज की मानी जाती है,न अपने परिवार की । वह बन जाती है एक ऐसी "देवदासी", जिसका जीवन भक्ति से नहीं,तथाकथित त्याग,तिरस्कार और शोषण से परिभाषित होता है ।
देवदासी शब्द सुनते ही भक्ति,सेवा और आध्यात्मिक समर्पण का भाव उभरता है लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल उलट है । किसी गरीब परिवार की बेटी को मंदिर में चढ़ा देना और फिर उसे तथाकथित धार्मिक अनुशासनों की आड़ में यौन शोषण का साधन बना देना,यह न तो धर्म है, न भक्ति और न ही किसी भी सभ्य समाज की निशानी । जिस समाज में देवदासी प्रथा प्रचलित रही,वहाँ यह मान लिया गया कि लड़की अब "ईश्वर की पत्नी" है और चूँकि उसका विवाह मनुष्यों से नहीं हुआ,इसलिए वह किसी सामाजिक बंधन में नहीं बंधी। यही सोच समाज के तथाकथित ऊँचे तबकों को यह अधिकार दे देती थी कि वे उसका शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक शोषण कर सकें ।
गरीबी, अंधविश्वास और पितृसत्तात्मक सोच इस देवदासी प्रथा के प्रमुख आधार रहे हैं। वह मानसिकता जो आज भी बेटी को बोझ समझती है, जिसे कन्यादान जैसे शब्दों से ढक दिया जाता है । यह वही सोच है जो एक लड़की को "दूसरे घर की" मानती है, और उसके जीवन की दिशा तय करने का अधिकार सिर्फ पुरुषों को देती है। चाहे वह पिता हो,पति हो या मंदिर में शरण लेने वाला कोई पुजारी। देवदासी प्रथा का सबसे भयावह पक्ष यह है कि एक बार कोई लड़की इस रास्ते पर डाल दी गई, तो फिर उसके लिए वापसी का कोई रास्ता नहीं होता । वह न तो सामान्य जीवन जी सकती है, न विवाह कर सकती है, न ही समाज में अपनी कोई पहचान बना सकती है ।
सरकारों ने समय-समय पर इस प्रथा को समाप्त करने के लिए कानून बनाए हैं । कर्नाटक देवदासी निषेध अधिनियम 1982,महाराष्ट्र देवदासी प्रथा उन्मूलन अधिनियम 2006 जैसे कानून उदाहरण हैं । इन कानूनों के तहत देवदासी बनाना अपराध है और दोषियों को दंडित करने का प्रावधान है ।
परंतु सवाल यह है कि क्या केवल कानून बना देने से यह कुप्रथा खत्म हो गई है ? क्या आज भी उन गांवों में लड़कियों को मंदिरों में नहीं छोड़ा जा रहा ? क्या आज भी तथाकथित भक्तों द्वारा उनके शरीर का दोहन नहीं हो रहा ? उत्तर दुखद है, हाँ, अब भी हो रहा है । क्योंकि जब तक समाज की सोच नहीं बदलेगी, तब तक कोई भी कानून प्रभावी नहीं हो सकता । देवदासी प्रथा केवल एक सामाजिक कुप्रथा नहीं, यह स्त्रीत्व का अपमान है । यह उस इंसानियत पर धब्बा है, जिसकी दुहाई हम अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देते हैं । इसलिए, इस प्रथा का अंत केवल कानून से नहीं होगा, यह तभी खत्म होगी जब हम अपनी सोच बदलेंगे । जब हम बेटियों को बोझ नहीं,आशीर्वाद समझेंगे । देवदासी प्रथा को खत्म करना सिर्फ एक सामाजिक सुधार नहीं,बल्कि इंसानियत को पुनर्जीवित करने का प्रयास है,एक ऐसा प्रयास जो हम सबको मिलकर करना होगा । “अर्पिता : एक देवदासी” में मैंने लेखक के तौर पर इसी प्रयास को सँजोने की कोशिश भर की है । यह प्रयास कितना सफल हो पाया है, इसका निर्णय आप पाठकों पर छोड़ रहा हूँ।
-एडवोकेट नवल किशोर सोनी

About the Author

एडवोकेट नवल किशोर सोनी

शिक्षा: M.A. B.Ed, LL.B & MSW

सामाजिक सरोकारों से विशेष जुड़ाव । साहित्य कलाओं में अभिरुचि । बोधि प्रकाशन, जयपुर से 'निराशाओं के पार' काव्य संग्रह प्रकाशित। कविता, कहानी एवं समसामयिक विषयों पर विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में निरन्तर लेखन । 'शिक्षा विमर्श' पत्रिका में शिक्षा पर विभिन्न आलेख प्रकाशित। प्रतिलिपि एप पर निरंतर कविता, कहानियाँ और लेख प्रकाशित।
शिक्षा और कानून से जुड़े मुद्दों पर संवाद और लेखन में रुचि है। शिक्षा के माध्यम से बदलाव हेतु प्रयासरत । यूनिसेफ, ऑक्सफेम, केयर इण्डिया, दिगंतर, सेव द चिल्ड्रन जैसी संस्थाओं के साथ जुड़कर विभिन्न शैक्षिक परियोजनाओं के संचालन में सहयोग । समता शिक्षा समिति, शैक्षिक सरोकार मंच के संस्थापक । वर्तमान में बालिका शिक्षा के लिए कार्यरत रमन मैग्सेसे अवॉर्डी संस्था एजुकेट गर्ल्स के लिए शिक्षाक्रम, पाठ्यक्रम और विषयवस्तु निर्माण के कार्य में संलग्न।
सम्पर्क :
मकान नंबर-15, विनायक विहार गणपतपुरा, मानसरोवर, जयपुर 302020 (राजस्थान)
मो.: +91-9828185168
ई-मेल navalkishor.s@gmail.com

Book Details

ISBN: 9789356928220
Publisher: Self publish
Number of Pages: 644
Dimensions: 6"x9"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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