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"काशी के रंग कविताओं के संग" एक भावनात्मक और सांस्कृतिक यात्रा है, जिसमें काशी के 84 से अधिक घाटों का उल्लेख किया गया है। इस पुस्तक में 12 प्रमुख घाटों का विस्तारपूर्वक वर्णन उनके ऐतिहासिक, धार्मिक और भावनात्मक पक्षों के साथ प्रस्तुत किया गया है।
लेखिका ने इस पुस्तक के माध्यम से पाठकों को काशी की आत्मा से जोड़ने का प्रयास किया है, ताकि जब कोई बनारस आए, तो वह इस नगरी से अनजान न रहे। पुस्तक में शुद्ध हिंदी के साथ-साथ भोजपुरी का प्रयोग भी किया गया है ।
यह कृति लेखिका के व्यक्तिगत अनुभवों, स्मृतियों और काशी के प्रति उनकी गहरी आस्था का सजीव चित्रण है। वह इस पुस्तक की प्रेरणा अपने परिवार, दोस्तों और गुरजनों को समर्पित करती हैं। काशी की गलियों और घाटों से जुड़ाव इतना गहरा है कि उनके मन को हर बार बस एक ही आदेश मिलता है—“ कि यहाँ ताउम्र गुज़र जाए।”
तो चलिए इस अनोखी नगरी का आपके दर्शन कराते हैं।
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