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अहम् भारत में डॉ. अमिता सक्सैना ने भारत की समग्र चेतना, प्राकृतिक विविधता, वीरता, ज्ञान, कला, साधना और सांस्कृतिक विरासत को एक निरंतर काव्य-स्वर में पिरोने का अनूठा प्रयास किया है। पचपन हज़ार सात सौ अठासी शब्दों में रचित यह कविता न केवल आकार में, बल्कि अपने उद्देश्य और संकल्प में भी अद्वितीय है, और इसे विश्व रिकॉर्ड के रूप में मान्यता प्राप्त है। यह कृति भारत को एक जीवित, अनुभव-योग्य और समग्र चेतना के रूप में प्रस्तुत करती है।
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