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“हिन्दी साहित्य: विमर्शों की ज़मीन” डॉ. गौरव कुमार मिश्र द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण अकादमिक कृति है, जिसमें समकालीन हिन्दी साहित्य के विविध विमर्शों का गहन और विचारोत्तेजक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। यह पुस्तक प्रवासी चेतना, पर्यावरण विमर्श, उत्तर-आधुनिकता, आदिवासी अस्मिता, नारीवादी दृष्टिकोण और दलित विमर्श जैसे विषयों को साहित्यिक, सामाजिक और दार्शनिक परिप्रेक्ष्य में विश्लेषित करती है।
प्रत्येक अध्याय में विषय की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, सैद्धांतिक आधार और समकालीन संदर्भों का समन्वय किया गया है, जिससे पाठक को न केवल साहित्यिक प्रवृत्तियों की समझ मिलती है, बल्कि समाज में हो रहे वैचारिक परिवर्तनों का भी बोध होता है।
स्पष्ट, शोधपरक और संतुलित भाषा में लिखी गई यह पुस्तक विद्यार्थियों, शोधार्थियों, अध्यापकों और गंभीर साहित्य प्रेमियों के लिए एक उपयोगी संदर्भ ग्रंथ है तथा विश्वविद्यालय स्तर के पाठ्यक्रमों के लिए अत्यंत उपयुक्त है।
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