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ज़िंदा हूँ मैं तुझमें (काव्य संग्रह)

डॉ दर्शनी प्रिय
Type: Print Book
Genre: Poetry, Politics & Society
Language: Hindi
Price: ₹199 + shipping
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Description of "ज़िंदा हूँ मैं तुझमें (काव्य संग्रह)"

कविताएँ जीवन के, आस्था के, प्रेम के, अनवरत संघर्ष और शांति के गीत गाती है। उनमें बर्फीले तूफ़ान को बहाकर ले जाने की क्षमता है तो गहरे सागर में डुबोने का माद्दा भी। मेरे लिए कविताएँ सिर्फ कविताएँ नहीं वरन जीवन का गीत है जिनकी मौन गुनगुनाहट में एक शोर है, जीवन की लय है और हृदय का स्पंदन भी। ये कविताएँ इस बात की बानगी हैं कि इन्हें हथियार बनाकर हिंसक समय से लड़ा जा सकता है और निरंकुश होती सत्ता पर सवाल भी उठाया जा सकता है। अपने दारुण समय को लेकर मन में उठते टीस को बड़ी सटीकता से अभिव्यक्त करती ये कविताएँ कहीं-कहीं वाजिब प्रश्न पूछती नजर आती हैं। एक कलमकार की हैसियत से निश्चित रूप से कह सकती हूँ कि अपनी लेखन यात्रा में मैं कई बार भटकी लेकिन लक्ष्य का विजय अंकुरण हर बार मुझे खींचकर कथ्य के समीप ले आया। ऩिःसंदेह अपरिपक्व कलम की कुछ आड़ी-तिरछी रेखाएँ आपको इस यात्रा स्लेट पर उभरी दिख जाएँ परन्तु बेबाक कलम की स्याही से कोरे कागज को रंगने की कोशिश की सराहना आप कर सकते हैं। अंतर्मन की अनुगूँज से साक्षात्कार कर आपका मन निश्चित ही आह्लादित होगा, ऐसा मेरा विश्वास है।

About the author(s)

डॉ. दर्शनी प्रिय एक नवांकुरित लेखिका, कथाकार और एक कुशल अनुवादिका हैं। उनका जन्म व लालन पालन बिहार में हुआ। वहीं से उन्होंने प्राथमिक शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा ग्रहण की। तदंतर उच्च शिक्षा की प्राप्ति उन्हें दिल्ली खीच लाई। उन्होंने दो विषयों: हिंदी साहित्य और समाजिक कार्य में दिल्ली विश्वविद्यालय से एम ए की डिग्री प्राप्त की। उन्होंने हिंदी पत्रकारिता सहित मानवाधिकार में भी डिप्लोमा हासिल किया है। आगे उन्होंने प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय - जेएनयू, दिल्ली से हिंदी_अंग्रेज़ी अनुवाद में एमफिल और पीएचडी की डिग्री प्राप्त की। कई विदेशी भाषाएं मसलन स्पेनिश, फ्रेंच, जापानी पर उनका अधिकार है। इसके अतिरिक्त वे अंग्रेजी और हिंदी और भोजपुरी में भी दखल रखती है। उनका शैक्षणिक प्रदर्शन अत्यंत उत्कृष्ट रहा हैं। सन् 2009 से वे उत्कृष्ट उपन्यासों और चर्चित पुस्तकों के अनुवाद कार्य में रत है। अनुवाद के क्षेत्र में उनका योगदान सराहनीय है। प्रतिष्ठित प्रकाशनों और लेखकों के साथ काम करते हुए उन्होंने अनुवाद के क्षेत्र में अपना अप्रतिम योगदान दिया है। इसके अतिरिक्त उनके पास इग्नू जैसे प्रतिष्ठित विशवविद्यालय में अध्यापन का अनुभव भी रहा है। वे राष्ट्रीय स्तर की पत्र पत्रिकाओं यथा दैनिक जागरण, राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्तान, नवभारत टाईम्स और दिल्ली प्रेस की पत्रिकाओं में निरंतर लेखन कार्य कर रही। देश विदेश में संगोष्ठियों,परिचर्चाओं और परिसंवादों में साझेदारी का उनका गहरा अनुभव रहा है। उन्होंने कई साहितियक सभाओं को संबोधित भी किया है।

सम्प्रति: भारत सरकार में अनुवाद अधिकारी के पद पर कार्यरत।

प्रकाशन: एक अनूदित पुस्तक "ख्वाहिशों के दरमियान" का प्रकाशन। प्रसिद्ध उपन्यास "अब्बू ने कहा था" का अंग्रेज़ी अनुवाद।

Book Details
Publisher: VIRGIN SAHITYAPEETH
Number of Pages: 115
Dimensions: 5.5"x8.5"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)
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