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पवनसुत भक्ति का अमर दीप एक भावप्रधान काव्यात्मक कृति है, जो भक्ति, सेवा और त्याग के सनातन मूल्यों को आधुनिक जीवन के संदर्भ में प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक भगवान श्री हनुमान जी की अनन्य भक्ति, विनम्रता और निष्काम कर्म को केंद्र में रखकर यह संदेश देती है कि सच्ची शक्ति अहंकार में नहीं, बल्कि समर्पण में निहित है।
कविताओं के माध्यम से हनुमान जी को केवल एक वीर योद्धा नहीं, बल्कि एक साधक और सेवक के रूप में चित्रित किया गया है, जिनका प्रत्येक कर्म धर्म और प्रेम से प्रेरित है। राम–भरत प्रसंगों के द्वारा भ्रातृभाव, त्याग और राजनीति में नैतिकता की महत्ता को उजागर किया गया है।
पुस्तक का समग्र स्वर मानवता, करुणा, सत्य और सेवा की ओर उन्मुख है। यह कृति पाठक को आत्मचिंतन की ओर ले जाती है और जीवन में भक्ति को चेतना तथा सेवा को साधना के रूप में स्वीकार करने की प्रेरणा देती है।
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