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यह पुस्तक दिव्यांगजनों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को उजागर करती है। इसमें कागजों पर मिलने वाले अधिकारों और वास्तविक जीवन की परिस्थितियों के बीच के अंतर को सरल भाषा में समझाया गया है।
लेखक ने दिव्यांग व्यक्तियों के संघर्ष, सामाजिक चुनौतियों और सरकारी व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति को उदाहरणों के माध्यम से प्रस्तुत किया है। यह पुस्तक समाज में जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ाने का एक प्रयास है।
यह पुस्तक पाठकों, शिक्षकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए उपयोगी मार्गदर्शिका है।
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