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जिंदगी की कड़ी धूप में जो छांव बनकर खड़े रहे, वो माँ-बाप हैं। यह किताब केवल पन्नों का संग्रह नहीं, बल्कि उन अनकहे एहसासों की गूँज है जो हमारे जीवन की नींव रखते हैं। लेखक परवीन सैनी ने अपनी कलम से माता-पिता के संघर्षों, उनकी उनकी उंगली पकड़कर चलने के सुकून को बेहद खूबसूरती से पिरोया है।
इस किताब में आपको मिलेगा:
माता-पिता के प्रति अटूट सम्मान और प्रेम की झलक।
जीवन के उन छोटे-छोटे पलों का विवरण जो हमें अपने परिवार के और करीब लाते हैं।
एक ऐसा नजरिया जो हमें अपने बुजुर्गों की अहमियत को नए सिरे से समझने में मदद करेगा。
यह किताब हर उस संतान के लिए है जो अपने माता-पिता के आशीर्वाद को दुनिया की सबसे बड़ी दौलत मानती है।
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