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प्रमुक्ति

मनोविकारों से मुक्ति का विज्ञान
प्रमुक्त
Type: Print Book
Genre: Self-Improvement
Language: Hindi
Price: ₹269 + shipping
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Description

पिंजरा खुला है, फिर भी आप कैद क्यों हैं ?

हम सब सुख की तलाश में हैं, लेकिन हाथ लगती है—चिंता, तनाव और कभी न खत्म होने वाली दौड़। बाहर से हम स्वतंत्र दिखते हैं, लेकिन भीतर हम अपने ही विचारों, पुरानी आदतों और 'मानसिक गुलामी' की अदृश्य जंजीरों में जकड़े हुए हैं।
'प्रमुक्ति' (Pramukti) केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि चेतना के रूपांतरण का एक विज्ञान है।
लेखक प्रमुक्त, जो एक मनोवैज्ञानिक और दार्शनिक हैं, इस कृति में प्राचीन अध्यात्म और आधुनिक मनोविज्ञान के सूत्रों को एक साथ पिरोते हैं। यह पुस्तक आपको 'कर्म और मन के विज्ञान' को समझाते हुए, उन सात द्वारों (7 Portals) से ले जाती है, जहाँ आप सीखेंगे:
सत्य-दर्शन: अपने असली स्वरूप (चेतना) को पहचानना।
समत्व योग: जीवन के उतार-चढ़ाव में अचल रहने की कला।
साक्षी भाव: विचारों और भावनाओं के बवंडर से बाहर निकलने की विधि।
यह पुस्तक आपको 'दिलासा' देने के लिए नहीं, बल्कि आपको 'जगा' कर आपकी खोई हुई संप्रभुता लौटाने के लिए लिखी गई है।
मुक्ति भविष्य में नहीं, अभी है। क्या आप अपनी परम स्वतंत्रता की उड़ान भरने के लिए तैयार हैं?.. अपनी यात्रा आज ही शुरू करें!

About the Author

लेखक प्रमुक्त
एक बहुआयामी मार्गदर्शक और अंतस-विज्ञान के प्रयोगधर्मी हैं। मनोविज्ञान, दर्शनशास्त्र और संगीत के गहन अध्येता होने के नाते, वे मानवीय पीड़ा को केवल एक संयोग नहीं, बल्कि मन की एक 'यांत्रिक त्रुटि' (Mechanical Error) मानते हैं जिसे सुधारा जा सकता है।
वे आधुनिक मनोविज्ञान के तर्क और सनातन प्रज्ञा की गहराई का अनूठा संगम हैं। एक मनोवैज्ञानिक के रूप में वे मन की जटिलताओं को सुलझाते हैं, तो एक संगीतज्ञ और कवि के रूप में वे सीधे आत्मा से संवाद करते हैं।
वे 'प्रमुक्ति फाउंडेशन' के संस्थापक हैं, जिसका उद्देश्य चेतना में आमूलचूल क्रांति लाना है। उनका कार्यक्षेत्र मनुष्यों तक सीमित न होकर समस्त अस्तित्व के लिए है। वे एक ऐसी दुनिया के निर्माण में जुटे हैं जहाँ सभी पशु, पक्षी, कीट-पतंगे, वनस्पतियाँ और प्रकृति के मूक प्रहरी (वन, पर्वत, वृक्ष, नदियाँ, सागर) और मनुष्य स्वयं, मानवीय शोषण से मुक्त हों।
उनके 'प्रमुक्ति बोध' अभियानों, ध्यान शिविरों और सेमिनार्स के माध्यम से वे एक ऐसी 'प्रमुक्ति जीवनशैली' का प्रसार कर रहे हैं, जो 'समग्र करुणा' (Total Compassion) और 'वैज्ञानिक अध्यात्म' पर आधारित है।
उनका स्पष्ट अनुभव है कि जब तक मनुष्य प्रकृति और अन्य जीवों के प्रति संवेदनशील नहीं होता, वह पूर्ण रूप से मुक्त और आनंदित नहीं हो सकता।

Book Details

ISBN: 9789357592000
Publisher: Pramukti Foundation
Number of Pages: 153
Dimensions: 5"x8"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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