You can access the distribution details by navigating to My Print Books(POD) > Distribution
“विद्या परा देवता“ मेरी इस प्रथम पुस्तक ‘नव सूर्योदय’ नामक पुस्तक में कविता ”हमारी विरासत“ में पर्यावरण के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है एवं वृक्ष हमारे लिए किस प्रकार उपयोगी हैं इसका आकलन हम भली-भांति कर पायेंगे। “मां” कविता में मां के समर्पण भाव की मनोरम झांकी प्रस्तुत की गई है। “कामयाबी“ नामक कविता में कामयाबी के लिए हमें कठिन से कठिन मेहनत कर लक्ष्य हासिल कर सकें और हम अपने महत्वपूर्ण उद्देश्यों की ओर आगे बढ़ सकें इस बारे में सीखने को मिलेगा। कविता “जज्बा“ का भाव यह है कि व्यक्ति अगर जज्बा रखे तो हर कठिनाइयों का सामना कर किसी भी मुश्किल सफर को पार का सकता है। कविता कोना रूपी अंतिम कविता राजस्थानी भाषा में “राजस्थान री धरती“ नाम से लिखी गई है। राजस्थान की पावन धरती पर जन्म लेकर क्यों न हम हमारी मायड़ भाषा राजस्थानी का गौरव गान और राजस्थान के गौरवशाली वैभव को उकेरा जाए इसी का एक छोटा सा प्रयास है यह राजस्थानी कविता। वहीं मेरे प्रथम प्रयास की प्रतीक इस छोटी सी पुस्तक में मैंने अपनी दो मौलिक कहानियों को भी शामिल किया है। “फिल्म कहानी की चोरी : साइबर सेल की समझदारी“ नामक कहानी में फिल्म कहानी की चोरी कितनी जटिल समस्या है, इससे कैसे बचा जाए और साइबर सेल की समझदारी
जैसे ताने- बानों में बंधा है इस कहानी का महत्वपूर्ण पक्ष। हाल ही में लिखी सूचना प्रौद्यौगिकी और साईबर सुरक्षा से जुड़ी यह रोमांचक कथा एक सस्पेंस पैदा करते दिखाई देती है। पुस्तक में दूसरी कहानी “राज की सफलता“ में कठिन मेहनत से मंजिल तक पहुंचने का एक सुन्दर संदेश दिया गया है जो सफलता की सीढ़ी का भाव अपने अंतस् में समेटे है। इस प्रकार यह मेरा छोटा सा लघु प्रयास रहा है। लेखकों, विद्वज्जनों, गुरुजनों और साहित्य के मनीषियों से मेरी विनम्र प्रार्थना है कि मेरे साहित्यिक क्षेत्र को और परिष्कृत कर निरन्तर सुपथ की ओर अग्रसर होने में अपना आशीर्वाद प्रदान करें ताकि मेरी अभिरुचि इस क्षेत्र की ओर बढ़ती रहे। मानव स्वभाववश हो सकता है कुछ त्रुटियां रह गई हों। इसके लिए विद्वज्जन मुझे क्षमा करेंगे और इस ओर मेरा ध्यान आकर्षित करेंगे। ताकि आगामी संस्करण में सुधार किया जा सके। इस कार्य में मेरा मार्गदर्शन एवं सहयोग करने वाले मेरे पिताजी शंकर लाल शास्त्री जी एवं समस्त बुद्धिजीवियों का हृदय से अपना आभार व्यक्त करता हूं। सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया: के उद्गारों के साथ।
आपका कृपाकांक्षी
प्रियांशु शर्मा
Currently there are no reviews available for this book.
Be the first one to write a review for the book नव सूर्योदय.