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Type: Print Book
Genre: Self-Improvement
Language: Hindi
Price: ₹180 + shipping
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Description of "ना काहू से दोस्‍ती ना काहू से वैर"

-कबिरा खड़ा बजार में मांगे सब की खैर । ना काहू से दोस्ती न काहू से वैर ॥
हम बन्दे है प्रेम के, मांगे सबकी खैर! अपनी सबसे दोस्ती नहीं किसी से वैर !

प्रेरक प्रसंगों का संकलन है । सभी के लाभप्रद होगा। पढ़़ाई के साथ साथ मानसी, नयनसी और सूरज ने सुक्तियों का संकल्‍न किया उसे आपके लिए प्रस्‍तुत किया गया है संकलित किया गया है!

About the author(s)

रौशन जसवाल विक्षिप्त
जन्म : 1963
शिक्षा : एम0ए0, एम0एड0
सम्प्रति : हिमाचल प्रदेश उच्चतर शिक्षा विभाग में अध्यापन।
प्रकाशन – अपने बारे में कुछ भी खास नहीं है, बस आम और साधारण ही है। साहित्य में रुचि है। पढ़ लेता हूँ, कभी-कभार लिख लेता हूँ। कभी प्रकाशनार्थ भेज भी देता हूँ। 1986 से यदाकदा प्रकाशित, प्रसारित और छिट पुट संकलित, पुरुस्कृत। लघुकथाओं पर साहित्य श्री, शकुंतला स्मृति सम्मान, रम्भा श्री प्राप्त। आकाशवाणी शिमला और दूरदर्शन शिमला से नैमितिक सम्बंध रहा ।
ईमेल पता : roshanvikshipt@gmail.com
ब्लॉ ग : www.roshanvikshipt.blogspot.com

Book Details
Publisher: हिमधारा
Number of Pages: 107
Dimensions: 5"x8"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)
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