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मीना शर्मा की कविताओं ने समाज के हर वर्ग को जोड़ने का, संतुष्ट करने का प्रयास किया है।
मनुष्य भावनाओं का पुञ्ज है भावनाओं से ही टकराता है और भावनाओं से ही राहत पाता है, अल्पायु से ही कवयित्री ने भावनाओं पर गहन अध्ययन किया है।
मुक्तक शैली में लिखे गये 'छनक' को पढ़कर शून्य से अनंत तक की यात्रा की जा सकती है, जो पूरी यात्रा का इच्छुक न हो, वो किसी पड़ाव का भी आनंद ले सकता है, आनंद उतना ही मिलेगा।
'छनक' की ख़ास बात यह है कि रस, छंद, अलंकार में उलझे बिना कवयित्री ने भावना के स्तर पर ऐसा प्रयोग किया, मानो रस छंद अलंकारों का पूरा ख़्याल रखा गया हो, ऐसा विलक्षण और चमत्कारिक साहित्य सदियों में एकबार देखने-पढ़ने को मिलता है।
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