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काश मैं ऐसा इंजीनियर होता (कविता संग्रह)

मुरली मनोहर श्रीवास्तव
Type: Print Book
Genre: Poetry
Language: Hindi
Price: ₹250 + shipping
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Description

खामोशियों की आवाज सुनने की तलब

कविता लिखना या कविता पसंद करना मनुष्य होने का हक अदा करना है। प्रकृति से सामंजस्य स्थापित करना है। मानवीय मूल्यों के प्रति समर्थन व्यक्त करना है। प्राणियों के प्रति ही नहीं, स्थूल वस्तुओं के प्रति भी मोहब्बत का नजरिया रखना है। साध्य और साधन के संतुलन का विवेक रखना है। इसलिए एक सच्चा कवि महत्तर मनुष्य का पर्याय होता है। अपने विकास क्रम में कविता ने दुरुहता का क्रमश: त्याग किया है लेकिन अपनी प्रभावशीलता कायम रखी है। समय कोई भी रहा हो, कविता बाअसर रही है। इसलिए एक कवि होना, व्यक्ति के सजग और साधक होने का प्रमाण होना है। कविता अपनी तरंग में हो तो उसका सरल रूप भी दिलों को धड़का देती है। निराशा के भंवर से निकालकर मस्तिष्क को चैतन्य कर देती है ।
पेशे से इंजीनियर मुरली मनोहर श्रीवास्तव मिजाज से कलाप्रेमी हैं। मशीनों और फाइलों के बीच की दिनचर्या को नरम और खुशनुमा बनाए रखने के लिए वह संवेदनाओं की रफ्फूगीरी करते हैं। एक इंजीनियर का लक्ष्य मशीनों, उपकरणों और तकनीकी संजालों को दुरुस्त और चलायमान बनाए रखने का होता है। लेकिन मुरली मनोहर श्रीवास्तव की आकांक्षा टूटते दिलों के बीच पुल बनाकर रिश्तों को बचाने की है। उनकी चाहत ऐसी सीढ़ी बनाने की है जो लोगों को उनके सपनों तक पहुंचा सके। वह खुद विकास के हरावल दस्ते में शामिल हैं लेकिन ऐसी सभ्यता विकसित होते देखना नहीं चाहते जो लोगों को उसके घरों से ही दूर कर दे। रोटी, कपड़ा और मकान के लिए दर-दर भटकते मनुष्य को आपदाओं से बचाना चाहते हैं। सुरक्षा की ऐसी चादर बनाना चाहते हैं जो विध्वंस से मानवता की रक्षा कर सके। जाहिर है, ऐसी कामना एक सदाशय व्यक्ति ही कर सकता है। मेलजोल और मोहब्बत की राह प्रशस्त करने के अभिलाषी मुरली मनोहर श्रीवास्तव इसलिए पेशे से इंजीनियर होते हुए भी पेशेवर इंजीनियर नहीं हैं। वह भावुक, दरियादिल और रचनात्मक हैं। उनके दिमाग में सौंदर्य के चित्र उभरते हैं, उनके हृदय में सहज जीवन की तरंगे उठती हैं। उनका मन घड़ी घड़ी चोट खाती इंसानियत को साझेदारी के मलहम से स्थितियों में सुधार के प्रति आश्वस्त करने को मचलता है। वह उम्मीदों का पर्वत चढ़ने की बजाय छोटे-छोटे सपनों को लांघने की वकालत करते हैं। वह इसलिए कि जीवन सहज ही अच्छा होता है, आचरण सरल ही श्रेयस्कर होता है।
मुरली मनोहर श्रीवास्तव ने जिन कविताओं में कम शब्द खर्च किए हैं, उसका असर अपेक्षाकृत ज्यादा है। जिन कविताओं में वह दूर तलक चलते हैं, वहां भावनाओं की गति अधिक है। अपनी यात्रा में वह कल्पनाओं की उड़ान खूब भरते हैं लेकिन बार बार और हर बार यथार्थ की ओर लौट पड़ते हैं। एक ही साथ स्थूल और सूक्ष्म संसार में आवाजाही करते हैं। आत्मनिष्ठ गलियों से निकलकर वस्तुनिष्ठ सड़कों पर टहलने लगते हैं। सौंदर्य के सरोवर से होकर आह्लाद के दरिया में गोते लगाने लगते हैं। वह खामोशियों की आवाज सुनने के तलबगार हैं क्योंकि लोकतंत्र का मुख्य आधार अवाम खामोशियों में बसर करता रह जाता है। बड़ा बनने की इच्छा उन्हें कतई नहीं, इसलिए कि वह छोटी छोटी खुशियों को बटोरना चाहते हैं जिनसे जीवन स्पंदित होता है और घर-आंगन की खूबसूरती निखर उठती है।
अपनी छोटी बड़ी कविताओं के जरिए मुरली मनोहर श्रीवास्तव सच्ची, सादगी भरी और ईमानदार जीवन की बार बार वकालत करते दिखाई देते हैं। वह बार बार मोहब्बत की बातें करते हैं, संग-साथ के मनोरथ भाव रचते हैं। मशीनी लाइफ के मारक प्रहार से बचने के लिए यह जरूरी भी है। शक और शुबहा को दूर करने के लिए असमंजस में बने रहने की बजाय वह स्नेहिल स्पर्श की जरूरत पर बल देते हैं। यानी वह निरंतर संवाद के आकांक्षी दिखाई देते हैं ताकि दूरियां कम हों और साहचर्य फलित हो। विकास की आंधी से वर्तमान को बचाने के लिए सुनहरे अतीत से प्रेरणा लेने से उन्हें गुरेज नहीं, बशर्ते उसमें बेहतरी की गुंजाइश हो। अच्छी भावनाओं से तैयार नए कविता संग्रह के लिए मुरली मनोहर श्रीवास्तव जी को बधाई।
भविष्य के लिए शुभकामनाएं।
-रणविजय सिंह सत्यकेतु
इलाहाबाद
मो. 9532617710

About the Author

लेखक का परिचय

नाम: मुरली मनोहर श्रीवास्तव
पिता का नाम: श्री विजय कुमार श्रीवास्तव ( लब्धप्रतिष्ठ साहित्यकार इलाहाबाद)
जन्मस्थान: इलाहाबाद
अध्ययन : बी.ई. मैकेनिकल इंजीनियरिंग (जामिया मिलिया इस्लामिया नई दिल्ली से)
प्रकाशन : नवभारत टाइम्स, दैनिक जागरण, हिंदुस्तान दैनिक, अमर उजाला, राष्ट्रीय सहारा, नई
दुनिया, मेरे सहेली, जागरण सखी सहित विभिन्न दैनिक व पत्रिका में एक हज़ार से अधिक रचनाएँ
प्रकाशित तथा निरंतर प्रकाशन जारी है।
अभी तक लिखी कहानियाँ मेरी सहेली, जागरण सखी व दैनिक जागरण जैसी पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं।
व्यंग्य लेखक के रूप में विशिष्ट पहचान हिन्दी की सभी प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित। अमर उजाला व राष्ट्रीय सहारा
में नियमित कॉलम।
वर्तमान में एन टी पी सी मेजा में उप महाप्रबंधक के पद पर कार्यरत

पुस्तकें :
पुस्तकें :1. सत्य जीतता है (हिन्दी अकादमी दिल्ली से प्रकाशित),
2. सम्भावना (साहित्य वीथी दिल्ली से प्रकाशित, वर्ष -2017 फ़्लिप कार्ट व अमेज़न दोनों पर उपलब्ध)
3. Posibility ( English translation of Sambhavana By Deepak Danish )on kindle
4 . गुरु गूगल दोऊ खड़े pustakbazaar.com द्वारा प्रकाशित
5 . क्षमा करना पार्वती pustakbazaar.com द्वारा प्रकाशित
6 . ख्वाबों की जिंदगी और 63 कविता
7. वह मैं हूँ
8.घोडा ब्रांड क्रिकेटर मेरे 71 व्यंग्य
9. दर्द और ख्वाब
10. दर्द के इम्यूनिटी बूस्टर्स
11. मुरली की दुनियाँ – ब्लग कलेक्शन
12 .जीत गए तुम
13 .ठहरो अभी तो जीना शुरू किया है
14 .I have just begun to be Translation of Abhi to jeena shuru kiya hai
15 .दरिया को मीठा रहना था
16. लास्ट कॉल – कहानी संग्रह
17 .कुछ तो कहता हूँ – I ब्लॉग कलेक्शन
18 .कुछ तो कहता हूँ -II ब्लॉग कलेक्शन
19. फरिश्ते
20. चाँद पर राइटर पेंटर और आर्टिस्ट भेज...
21 .Pain & Dream

संप्रति : हर समय कुछ करते रहने की इच्छा का बने रहना व पाठकों द्वारा प्रदान किए जाने वाला स्नेह ही मेरे लिखने का आधार है ।

Book Details

ISBN: 9789376851706
Publisher: shanvipublications
Number of Pages: 99
Dimensions: 5.5"x8.5"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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