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रूपेश रंजन, बिहार के मुज़फ्फरपुर से आने वाले एक संवेदनशील और आत्मविश्लेषी कवि हैं, जिनकी लेखनी में दर्द, सच्चाई और आत्मअवलोकन का अद्भुत संगम मिलता है। उनकी कविताएँ जीवन की उन परतों को उधेड़ती हैं, जिन्हें लोग अक्सर महसूस तो करते हैं, पर शब्दों में कह नहीं पाते।
रूपेश की सबसे बड़ी ताक़त है— उनकी सादगी में छिपी गहराई।वह रोज़मर्रा के अनुभवों, टूटे रिश्तों, अधूरे सपनों और खामोश जज़्बातों को इस तरह पिरोते हैं कि हर पाठक अपने भीतर का कोई कोना खुलता हुआ महसूस करता है।
मुज़फ्फरपुर की मिट्टी में पले इस युवा कवि ने अपनी अनोखी शैली से एक ऐसी दुनिया बनाई है जहाँ प्रेम अपनी मासूमियत में, और दर्द अपनी सच्चाई में, दोनों बराबर सजते हैं।
उनकी लिखावट में एक बेचैनी है, पर वही बेचैनी आत्मा को छू जाती है। उनकी पंक्तियों में एक खामोशी है, पर वही खामोशी दिल में गूंजती रहती है। और उनकी कविताओं में एक ईमानदारी है, जो हर बार पाठक को भीतर तक झकझोर देती है।
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