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“नारीशक्ति” एक ऐसा काव्य-संग्रह है जो स्त्री के अस्तित्व, संघर्ष, प्रेम, साहस और उसकी अदृश्य ऊर्जा को गहराई से स्पर्श करता है। यह पुस्तक केवल कविताओं का संकलन नहीं, बल्कि स्त्री-जीवन की उन परतों का भावात्मक चित्रण है जिनमें उसकी नर्मी भी है और उसका अग्नि-स्वरूप भी। हर कविता स्त्री के विभिन्न रूपों—माँ, बेटी, बहन, प्रेमिका, मित्र, योद्धा और सृष्टि की सृजनहार—को एक ऐसी संवेदनशील भाषा में उकेरती है जो पाठक को भीतर तक हिला देती है और यह एहसास कराती है कि नारी केवल एक भूमिका नहीं, बल्कि एक सम्पूर्ण चेतना है।
इस संग्रह में स्त्री की यात्रा को उसकी चुप्पियों, उसकी लड़ाइयों, उसके सपनों और उसके आत्मबल के प्रकाश से जोड़ते हुए प्रस्तुत किया गया है। कविताएँ नारी के भीतर छिपे उस उजाले को सामने लाती हैं जो उसे हर टूटन के बाद भी उठने की शक्ति देता है, जो उसे सीमाओं से लड़ने का हौसला देता है और जो उसके अस्तित्व को अपराजेय बनाती है। यह पुस्तक नारीत्व की उस आंतरिक ज्योति को शब्द देती है जो समाज को दिशा देती है, परिवार को आधार देती है और दुनिया में सबसे पवित्र ऊर्जा बनकर प्रवाह करती रहती है।
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