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"प्यार सुकून का नाम है... खौफ का नहीं।"
रात के 11 बजे, कोलकाता एयरपोर्ट की एक तूफानी रात। हाथ से रिसता खून और दिल में बदले की आग लिए समीर अपनी एक्स-गर्लफ्रेंड की शादी बर्बाद करने मुंबई निकल पड़ा है।
वो एक भयानक तमाशा करने ही वाला है कि तभी एक अजनबी उसे एक कहानी सुनाता है - 'अली' और एक रहस्यमयी 'दस के नोट' की कहानी। एक ऐसी कहानी जो समीर को उसकी खुद की बर्बादी का आईना दिखाती है।
क्या एक मामूली सा मुड़ा हुआ दस का नोट समीर का खौफनाक इरादा बदल पाएगा? या वो हमेशा के लिए एक 'साइको आशिक़' बनकर रह जाएगा?
पढ़िए एक ऐसा मास्टरपीस जो सिखाता है कि प्यार में मिले दर्द से आज़ादी कैसे पाई जाती है।
क्योंकि कुछ कर्ज़ पैसों से नहीं... हिम्मत से चुकाए जाते हैं।
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