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इक्कीसवीं सदी को अक्सर ज्ञान, नवाचार और तीव्र परिवर्तन की सदी कहा जाता है। आज का विद्यार्थी जिस दुनिया में बड़ा हो रहा है, वह पहले की तुलना में कहीं अधिक जटिल, प्रतिस्पर्धात्मक और परिवर्तनशील है। तकनीकी विकास, सामाजिक परिवर्तन और वैश्विक चुनौतियों ने जीवन के स्वरूप को बदल दिया है। ऐसे समय में यह आवश्यक हो जाता है कि विद्यार्थियों को केवल विषयगत ज्ञान ही न दिया जाए, बल्कि उन्हें ऐसे जीवन कौशल भी सिखाए जाएँ जो उन्हें जीवन की वास्तविक परिस्थितियों में सक्षम और आत्मनिर्भर बना सकें।
जीवन कौशल शिक्षा का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों में ऐसी क्षमताओं का विकास करना है, जिनकी सहायता से वे स्वयं को समझ सकें, अपने विचारों और भावनाओं को पहचान सकें तथा जीवन की समस्याओं का विवेकपूर्ण समाधान खोज सकें। स्व-जागरूकता (Self-Awareness), समस्या समाधान (Problem Solving), सृजनात्मक चिंतन (Creative Thinking), क्रिटिकल थिंकिंग (Critical Thinking), हायर ऑर्डर थिंकिंग (Higher Order Thinking) और लचीलापन या दृढ़ता (Resilience) जैसे कौशल आज के समय में प्रत्येक बालक-बालिका के समग्र विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। ये कौशल न केवल उनके शैक्षणिक जीवन को समृद्ध करते हैं, बल्कि उन्हें सामाजिक, भावनात्मक और नैतिक रूप से भी सशक्त बनाते हैं।
इसी विचार को ध्यान में रखते हुए इस कहानी संग्रह की रचना की गई है। इस संग्रह में सम्मिलित कहानियाँ केवल मनोरंजन के लिए नहीं हैं, बल्कि वे जीवन के गहरे संदेशों और अनुभवों को सरल और सहज रूप में प्रस्तुत करती हैं। प्रत्येक कहानी में ऐसे प्रसंग और पात्र हैं जो विद्यार्थियों को सोचने, समझने और सीखने के लिए प्रेरित करते हैं। इन कहानियों के माध्यम से यह प्रयास किया गया है कि विद्यार्थी स्वयं अपने अनुभवों से सीखें और जीवन कौशलों की महत्ता को महसूस करें।
इस संग्रह की कहानियों में प्रस्तुत बाल पात्र सामान्य परिवेश से आते हैं। वे भी हमारी ही तरह साधारण परिवारों, गाँवों और समाज से जुड़े हुए हैं। लेकिन उनकी विशेषता यह है कि वे जीवन की परिस्थितियों को केवल स्वीकार नहीं करते, बल्कि अपने साहस, बुद्धिमत्ता और रचनात्मकता के माध्यम से उन्हें बदलने का प्रयास करते हैं। उनके अनुभवों में हमें यह दिखाई देता है कि छोटी-सी सोच, एक नया विचार या दृढ़ निश्चय किस प्रकार जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।
उदाहरण के लिए, किसी कहानी का पात्र अपनी परिस्थिति को समझते हुए स्व-जागरूकता का परिचय देता है, तो कोई अन्य पात्र किसी समस्या का समाधान खोजने के लिए समस्या समाधान कौशल का उपयोग करता है। कहीं विद्यार्थियों की कल्पना शक्ति और कला के माध्यम से सृजनात्मक चिंतन का विकास दिखाई देता है, तो कहीं कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए Resilience अर्थात दृढ़ता और धैर्य का परिचय मिलता है। इसी प्रकार कई कहानियाँ विद्यार्थियों को यह भी सिखाती हैं कि किसी भी बात को आँख मूँदकर स्वीकार करने के बजाय उस पर विचार करना, तर्क करना और सही निष्कर्ष तक पहुँचना कितना आवश्यक है। यही आलोचनात्मक चिन्तन और उच्च स्तरीय चिन्तन (HOT) की आधारशिला है। यदि इस पुस्तक की कहानियाँ बालक-बालिकाओं के मन में आत्मविश्वास, संवेदनशीलता, रचनात्मकता और सकारात्मक सोच का एक छोटा-सा बीज भी बो सकें, तो लेखक के रूप में मेरा यह प्रयास सार्थक होगा।
इसी आशा और विश्वास के साथ यह कहानी संग्रह पाठकों को समर्पित है कि ये कहानियाँ पढ़ने के आनन्द के साथ-साथ विद्यार्थियों के जीवन में प्रेरणा, समझ और नई संभावनाओं के द्वार खोलेंगी।
नवल किशोर सोनी
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