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रिश्ता तेरा मेरा (दो न्यायाधीशों की प्रेम कहानी)

(दो न्यायाधीशों की प्रेम कहानी)
Advocate Naval Kishor Soni
Type: Print Book
Genre: Literature & Fiction
Language: Hindi
Price: ₹518 + shipping
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Description

‘रिश्ता तेरा मेरा’ ( दो न्यायाधीशों की प्रेम कहानी) उपन्यास लिखने की प्रेरणा मुझे समाज में व्याप्त विभिन्न सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक और राजनीतिक विसंगतियों तथा विभेदों को गहराई से देखने और समझने के बाद मिली। सर्वविदित है कि साहित्य समाज का दर्पण होता है, और यही कारण है कि इस उपन्यास में भी मैंने उन परिस्थितियों और स्थितियों का सहज चित्रण किया है जो पुष्पा और करीम के जीवन में घटित होती हैं। पुष्पा और करीम, दोनों ही मध्यमवर्गीय परिवारों से आते हैं और न्याय के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने का स्वप्न सँजोते हैं। सामान्यत: कॉलेज जीवन में जैसे दो युवा हृदय एक-दूसरे के निकट आ जाते हैं और समाज के कठोर नियमों तथा तथाकथित संस्कारों को चुनौती देते हुए अपने मिलन की चाह में हर बाधा का सामना करते हैं, वैसी ही स्वाभाविक जिद उनके जीवन में भी दिखाई देती है। फर्क इतना मात्र है कि उन्होंने जिस विधि-विधान को अपने व्यवसाय और जीवन-निर्वाह का साधन बनाया, उसी राह पर चलते हुए वे अपने संघर्षों का समाधान भी धैर्य और शालीनता के साथ करते हैं। यही विशेषता उन्हें साधारण प्रेमी-प्रेमिका से अलग बनाती है।
इस उपन्यास के मुख्य पात्र पुष्पा और करीम का प्रेम सहज और स्वाभाविक परिस्थितियों में विकसित होता है। दुर्भाग्य यह है कि जिन परिजनों से वे सबसे अधिक विश्वास और सहयोग की अपेक्षा रखते हैं, वही उनके मार्ग में अवरोधक बनते हैं। समाज की संकीर्ण सोच, धार्मिक परिधियाँ और वे तत्व, जो प्रेम जैसे पवित्र रिश्ते को भी जाति और धर्म की बेड़ियों में बाँधना चाहते हैं, सबसे उन्हें दो-चार होना पड़ता है।
कहानी में नाटकीय मोड़ तब आता है जब पुष्पा, करीम के शिशु की अविवाहित माँ बन जाती है और अपने ही पिता के षड्यंत्र में फँसकर अपने प्रिय को खो देती है। परिस्थितियों से समझौता कर वह गुमनाम जीवन अपनाने का निर्णय लेती है। दूसरी ओर करीम भी विवश होकर गृहस्थी में बँध जाता है, परंतु भीतर से वह स्वयं को उस चक्रव्यूह में फँसा हुआ महसूस करता है, जिससे बाहर निकलना कठिन है।
कथानक को आगे बढ़ाने में कोर्ट रजिस्ट्रार रमाकान्त गुप्ता, करीम की पत्नी तबस्सुम (तब्बू), तबस्सुम का भाई कादिर और अनेक सहायक पात्र महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये पात्र कभी नायक बनकर तो कभी खलनायक बनकर परिस्थितियों को जटिल बनाते हैं और उपन्यास की कहानी को रोचक मोड़ों से बाँधे रखते हैं।
यह 111 भागों में विभाजित उपन्यास केवल पुष्पा और करीम की प्रेमकथा भर नहीं है, बल्कि उनके पेशेवर जीवन, सामाजिक संघर्षों और निजी रिश्तों का ऐसा समन्वय है जो वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य से गहरा साम्य रखता है। कथा के साथ चलते हुए पाठक बार-बार स्वयं को समाज की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ पाते हैं। बीच-बीच में रहस्य और रोमाँ च से भरे अप्रत्याशित मोड़ पाठकों की जिज्ञासा को बनाए रखते हैं और अक्सर उनकी धारणाओं को चुनौती भी देते हैं। प्रेम, संघर्ष, रहस्य और सामाजिक-सांस्कृतिक द्वंद्व से सजी यह प्रस्तुति आप पाठकों के समक्ष है। मुझे विश्वास है कि यह उपन्यास आपके हृदय को छूएगा और आपको अपने समय और समाज के बारे में सोचने का नवीन नजरिया देगा। आपके मूल्यवान सुझावों की प्रतीक्षा रहेगी, ताकि आने वाली रचनाओं में उन्हें सम्मिलित कर आपकी अपेक्षाओं पर खरा उतर सकूँ ।
-नवल किशोर सोनी

About the Author

लेखक परिचय
शिक्षा: M.A. B.Ed, LL.B & MSW
सामाजिक सरोकारों से विशेष जुड़ाव। साहित्य कलाओं में अभिरुचि।
बोधि प्रकाशन, जयपुर से निराशाओं के पार काव्य संग्रह (2022) प्रकाशित,अर्पिता : एक देवदासी -उपन्यास (2026) प्रकाशित, शिक्षा में सुधार : चुनौतियाँ और सम्भावनाएं -पुस्तक प्रकाशित (2026) । कविता, कहानी एवं समसामयिक विषयों पर विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में निरन्तर लेखन।
'शिक्षा विमर्श' पत्रिका में शिक्षा पर विभिन्न आलेख प्रकाशित।
प्रतिलिपि एप पर निरंतर कविता, कहानियाँ और लेख प्रकाशित।
शिक्षा और कानून से जुड़े मुद्दों पर संवाद और लेखन में रुचि।
शिक्षा के माध्यम से बदलाव हेतु प्रयासरत।
यूनिसेफ, ऑक्सफेम, केयर इण्डिया, दिगंतर, सेव द चिल्ड्रन जैसी संस्थाओं के साथ जुड़कर विभिन्न शैक्षिक परियोजनाओं के संचालन में सहयोग।
समता शिक्षा समिति, शैक्षिक सरोकार मंच और तार्किक दुनिया के संस्थापक ।

वर्तमान में बालिका शिक्षा के लिए कार्यरत रमन मैग्सेसे अवॉर्डी संस्था एजुकेट गर्ल्स के लिए शिक्षाक्रम, पाठ्यक्रम और विषयवस्तु निर्माण के कार्य में संलग्न ।
सम्पर्क :
मकान नंबर-15, विनायक विहार
गणपतपुरा, मानसरोवर,जयपुर 302020 (राजस्थान)
मो.: +91-9828185168
ई-मेल navalkishor.s@gmail.com

Book Details

ISBN: 9789357777995
Publisher: Naval Kishor Soni
Number of Pages: 292
Dimensions: 6"x9"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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