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शहर, स्पा और चंचल (देह एक, ज़ख्म अनेक)

(देह एक, ज़ख्म अनेक)
Advocate Naval Kishor Soni
Type: Print Book
Genre: Literature & Fiction, Politics & Society
Language: Hindi
Price: ₹390 + shipping
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Description

हर कहानी का एक आरंभ होता है,लेकिन हर कहानी का उद्देश्य एक जैसा नहीं होता। कुछ कहानियाँ केवल मनोरंजन के लिए लिखी जाती हैं, और कुछ कहानियाँ इसलिए, ताकि वे हमारे भीतर छुपे हुए प्रश्नों को जगाएँ,हमें असहज करें,और अंततः हमें सोचने पर मजबूर करें।
“शहर,स्पा और चंचल (देह एक, ज़ख्म अनेक) ऐसी ही एक कहानी है। यह सिर्फ़ चंचल की कहानी नहीं है, यह उन अनगिनत स्त्रियों की कहानी है जो परिस्थितियों के दबाव में ऐसे रास्तों पर धकेल दी जाती हैं जिन्हें उन्होंने कभी चुना ही नहीं।
कहानी का उद्भव
इस उपन्यास में कहानी का उद्भव किसी एक घटना में नहीं, बल्कि समाज की उन परतों में हैं जिन्हें हम अक्सर देखना नहीं चाहते। हम एक ऐसे समय में जी रहे हैं जहाँ शहर चमकते हैं, रोज़गार के नए अवसर बनते हैं, और आधुनिकता का दावा किया जाता है। लेकिन इसी चमक के पीछे कुछ अंधेरे कोने भी हैं, जहाँ मजबूरी, शोषण और चुप्पी अब भी जीवित हैं।
स्पा सेंटर, जो देखने में एक सामान्य व्यवसाय लगता है, कई बार उस अंधेरे का हिस्सा बन जाता है जहाँ शरीर से अधिक आत्म सम्मान का व्यापार होता है।
यह उपन्यास उसी सच्चाई को उजागर करने का प्रयास है। चंचल एक पात्र नहीं, एक प्रतीक, चंचल इस कहानी की नायिका है, लेकिन वह सिर्फ़ एक व्यक्ति नहीं है, वह एक प्रतीक है।
वह प्रतीक है, उस माँ का जो अपनी बच्ची के भविष्य के लिए हर दर्द सहने को तैयार होती है। उस स्त्री का जो मजबूरी में झुकती है, लेकिन टूटती नहीं। उस आवाज़ का जो देर से सही, लेकिन उठती है। चंचल की यात्रा डर से साहस तक की यात्रा है। चुप्पी से आवाज़ तक की यात्रा है और सबसे महत्वपूर्ण अपने अस्तित्व को पहचानने की यात्रा है।
मजबूरी बनाम विकल्प
इस उपन्यास का एक महत्वपूर्ण प्रश्न है, क्या हर निर्णय स्वेच्छा से लिया जाता है ?
समाज अक्सर कहता है, “अगर गलत था, तो छोड़ क्यों नहीं दिया?” लेकिन यह सवाल उन परिस्थितियों को नजरअंदाज कर देता है जहाँ विकल्प ही नहीं होते। गरीबी, जिम्मेदारियाँ, सामाजिक दबाव, ये सब मिलकर ऐसी स्थिति बना देते हैं जहाँ व्यक्ति चुनाव नहीं करता, बल्कि धकेला जाता है।
यह उपन्यास उसी अंतर को समझाने का प्रयास है, चुनाव और मजबूरी के बीच का अंतर।
सिस्टम और समाज
यह कहानी केवल एक व्यक्ति या एक स्पा सेंटर की नहीं है। यह उस पूरे तंत्र की कहानी है जो कई बार गलत को अनदेखा करता है, और सही को अकेला छोड़ देता है। कानून, प्रशासन और समाज, तीनों की अपनी-अपनी भूमिका है। लेकिन जब ये तीनों अपनी जिम्मेदारी से पीछे हटते हैं, तो अन्याय जन्म लेता है। इस उपन्यास में आप देखेंगे कि कैसे एक छोटा-सा समझौता धीरे-धीरे एक बड़े नेटवर्क में बदल जाता है और कैसे एक छोटी-सी आवाज़ उस पूरे नेटवर्क को चुनौती दे सकती है।
सुषमा, विरोधाभास का चेहरा
इस कहानी में सुषमा की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। वह खलनायक नहीं है, लेकिन नायक भी नहीं। वह उस सिस्टम का हिस्सा है जो गलत है, लेकिन वह खुद भी उसी सिस्टम की उपज है।
उसका चरित्र हमें यह सोचने पर मजबूर करता है, क्या हर अपराधी सिर्फ़ अपराधी होता है ? या वह भी परिस्थितियों का परिणाम होता है ? सुषमा का पश्चाताप इस कहानी को एक गहराई देता है, जहाँ सज़ा के साथ-साथ सुधार की संभावना भी दिखाई देती है।
मीरा : भविष्य की आशा
अगर चंचल इस कहानी का संघर्ष है, तो मीरा उसकी आशा है।
मीरा उस पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करती है जो डर से नहीं, सच से सीखती है। उसकी मासूम दृष्टि पूरी कहानी को एक नया अर्थ देती है। जहाँ चंचल ने डर के साथ जीवन जिया, वहीं मीरा निर्भय होकर सपने देखती है। और यही इस कहानी का सबसे सुंदर पक्ष है, संघर्ष का परिणाम अगली पीढ़ी की स्वतंत्रता है।
साहस की परिभाषा
इस उपन्यास में साहस को किसी नायकत्व के रूप में नहीं, बल्कि एक साधारण मानवीय गुण के रूप में प्रस्तुत किया गया है। साहस का मतलब डर का न होना नहीं है। साहस का मतलब है, डर के बावजूद सही का साथ देना।

चंचल कोई असाधारण महिला नहीं थी। वह साधारण थी। लेकिन उसका निर्णय असाधारण था। और यही इस कहानी का सार है। साधारण लोग भी असाधारण बदलाव ला सकते हैं।
लेखन का उद्देश्य
स उपन्यास को लिखने का उद्देश्य किसी एक वर्ग, संस्था या व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं है। बल्कि उद्देश्य है, समाज के उन पहलुओं को सामने लाना जिन पर बात कम होती है। उन आवाज़ों को स्थान देना जो अक्सर दबा दी जाती हैं। और पाठकों को यह सोचने के लिए प्रेरित करना कि हम अपने आसपास हो रहे अन्याय के प्रति
कितने जागरूक हैं।
एक प्रश्न आपके लिए
जब आप इस उपन्यास को पढ़ेंगे, तो शायद आपके मन में कई प्रश्न उठेंगे जैसे- अगर आप चंचल की जगह होते, तो क्या करते ? अगर आप सुषमा की जगह होते, तो क्या बदलते ? और सबसे महत्वपूर्ण अगर आपके सामने कोई अन्याय हो, तो क्या आप चुप रहेंगे ?
यह कहानी इन सवालों के जवाब नहीं देती, लेकिन उन्हें आपके सामने रखती है। हर कहानी का एक अंत होता है, लेकिन इस कहानी का अंत दरअसल एक शुरुआत है। यह शुरुआत है, जागरूकता की, साहस की, और बदलाव की। अगर इस उपन्यास को पढ़ने के बाद आप एक पल के लिए भी रुककर सोचते हैं, या किसी अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने की प्रेरणा पाते हैं, तो यह लेखन सफल होगा।

“शहर, स्पा और चंचल (देह एक, ज़ख्म अनेक)” सिर्फ़ एक कहानी नहीं, एक अनुभव है। एक ऐसी यात्रा, जो दर्द से शुरू होती है, साहस से गुजरती है, और उम्मीद पर खत्म होती है।
-एडवोकेट नवल किशोर सोनी

About the Author

लेखक परिचय
नवल किशोर सोनी
माता-पिता : स्व.श्रीमती कमला देवी, स्व. श्री लड्डू लाल सोनी
जन्म: 10 नवम्बर 1974, माँगरोल, जिला बारां, राजस्थान
जीवन संगिनी: श्रीमती मंजू सोनी (प्राध्यापिका, राजकीय सीनियर माध्यमिक विद्यालय, अजमेर)
पुत्री: नव्या सोनी (अध्ययनरत)
शिक्षा: M.A. B.Ed, LL.B & MSW
सामाजिक सरोकारों से विशेष जुड़ाव। साहित्य कलाओं में अभिरुचि।
बोधि प्रकाशन, जयपुर से निराशाओं के पार काव्य संग्रह (2022) प्रकाशित, अर्पिता : एक देवदासी (उपन्यास) प्रकाशित, रिश्ता तेरा मेरा (दो न्यायाधीशों की प्रेम कहानी), उपन्यास (2026) प्रकाशित, कहानियों के आईने में जीवन कौशल (21वीं सदी के जीवन कौशलों पर आधारित कहानियाँ) पुस्तक प्रकाशित, शिक्षा में सुधार : चुनौतियाँ एवं संभावनाएं -पुस्तक प्रकाशित (2026)। आओ, तुम्हें मैं मीत लिखूँ (काव्य संग्रह) प्रकाशित, कविता, कहानी एवं समसामयिक विषयों पर विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में निरन्तर लेखन।
'शिक्षा विमर्श' पत्रिका में शिक्षा पर विभिन्न आलेख प्रकाशित। प्रतिलिपि एप पर निरंतर कविता, कहानियाँ और लेख प्रकाशित। शिक्षा और कानून से जुड़े मुद्दों पर संवाद और लेखन में रुचि। शिक्षा के माध्यम से बदलाव हेतु प्रयासरत।
यूनिसेफ, ऑक्सफेम, केयर इण्डिया, दिगंतर, सेव द चिल्ड्रन जैसी संस्थाओं के साथ जुड़कर विभिन्न शैक्षिक परियोजनाओं के संचालन में सहयोग। समता शिक्षा समिति, शैक्षिक सरोकार मंच और तार्किक दुनिया के संस्थापक ।
वर्तमान में बालिका शिक्षा के लिए कार्यरत रमन मैग्सेसे अवॉर्डी संस्था एजुकेट गर्ल्स के लिए शिक्षाक्रम, पाठ्यक्रम और विषयवस्तु निर्माण के कार्य में संलग्न ।
सम्पर्क :
मकान नंबर-15, विनायक विहार
गणपतपुरा, मानसरोवर,जयपुर 302020 (राजस्थान)
ई-मेल navalkishor.s@gmail.com

Book Details

ISBN: 9789358100488
Publisher: Naval Kishor Soni
Number of Pages: 193
Dimensions: 6"x9"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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