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पराया वर

पलंग पर सामान, मंडप में पराया
AMIT RAJ PRASAD
Type: Print Book
Genre: Romance, Religion & Spirituality
Language: Hindi
Price: ₹395 + shipping
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Description

“पराया वर: पलंग पर समान, मंडप में परायापन”
यह पुस्तक प्रेम, विवाह और जाति के बीच छिपे उस कड़वे सच को उजागर करती है, जिस पर समाज अक्सर चुप्पी साध लेता है। आज के आधुनिक दौर में जहाँ रिश्ते बिना जाति देखे बन जाते हैं, वहीं विवाह के समय वही समाज अचानक कुल, गोत्र और जाति की दीवारें खड़ी कर देता है। यह पुस्तक उसी दोहरे चरित्र पर गहरी साहित्यिक चोट है।
यह कोई आरोप-पत्र नहीं, बल्कि समाज का आईना है—जहाँ प्रेम स्वीकार्य है, लेकिन सम्मान नहीं; जहाँ शरीर की बराबरी है, पर रिश्तों की नहीं। लेखक ने इस कृति में वास्तविक जीवन से प्रेरित घटनाओं, अनुभवों और सामाजिक व्यवहारों को संवेदनशील भाषा में प्रस्तुत किया है, ताकि पाठक स्वयं प्रश्न करे और स्वयं उत्तर खोजे।
पुस्तक में अंतरजातीय प्रेम, विवाह, सामाजिक दबाव, परिवार की भूमिका, कानून और ज़मीनी सच्चाई जैसे विषयों को मानवीय दृष्टिकोण से देखा गया है। यह कहानी किसी एक व्यक्ति या वर्ग के विरुद्ध नहीं, बल्कि उस सोच के विरुद्ध है जो आज भी प्रेम को जाति के तराजू में तौलती है।
“पराया वर” उन पाठकों के लिए है जो सिर्फ कहानी नहीं, समाज को समझना चाहते हैं। यह पुस्तक युवाओं, अभिभावकों, शिक्षकों और हर उस व्यक्ति के लिए है जो मानता है कि प्रेम की कोई जात नहीं होती।

About the Author

अमित राज प्रसाद कुशवाहा समकालीन हिंदी साहित्य के एक संवेदनशील और यथार्थवादी लेखक हैं, जिनकी लेखनी समाज के उन पहलुओं को उजागर करती है, जिन पर अक्सर चुप्पी साध ली जाती है। उनकी रचनाएँ किसी व्यक्ति, वर्ग या समुदाय के विरोध में नहीं, बल्कि सामाजिक सच को सामने रखने का एक ईमानदार प्रयास हैं।
लेखक का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ।
उनके पिता नग नारायण प्रसाद और माता श्रीमती किरण देवी ने उन्हें संस्कार, संवेदना और सत्य के साथ खड़े रहना सिखाया। यही मूल्यों की विरासत लेखक की हर रचना में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
अमित राज प्रसाद कुशवाहा की किताबें प्रेम, संबंध, समाज, जाति, चेतना और मानवीय द्वंद्व जैसे विषयों पर केंद्रित हैं। वे मानते हैं कि साहित्य का उद्देश्य किसी को ठेस पहुँचाना नहीं, बल्कि पाठक को सोचने पर विवश करना होना चाहिए। उनकी लेखनी न तो आरोप लगाती है, न ही निर्णय सुनाती है—वह केवल प्रश्न उठाती है।
लेखक की कृतियाँ उन पाठकों के लिए हैं जो रिश्तों की गहराई, समाज की सच्चाई और मनुष्य की संवेदना को समझना चाहते हैं। उनकी भाषा सरल, प्रभावशाली और दिल तक पहुँचने वाली है, जो हर वर्ग और हर पीढ़ी के पाठकों से संवाद करती है।

Book Details

ISBN: 9789356555006
Publisher: KUSHWAHA
Number of Pages: 209
Dimensions: 5.5"x8.5"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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