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सैन समाज का गौरवशाली इतिहास

Anand Kumar Ashodhiya
Type: Print Book
Genre: Social Science, History
Language: Hindi
Price: ₹200 + shipping
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Description

सैन समाज का गौरवशाली इतिहास
— न्याय, सेवा और भारतीय सभ्यता के अदृश्य स्तंभों का पुनर्पाठ
“सैन समाज का गौरवशाली इतिहास” किसी एक समुदाय का संकीर्ण इतिहास नहीं, बल्कि भारतीय सामाजिक संरचना के उन मूल स्तंभों की खोज है जिन्हें इतिहास ने लंबे समय तक हाशिये पर रखा। यह पुस्तक उस समाज की सभ्यतागत यात्रा को सामने लाती है, जिसकी पहचान केवल पेशे से नहीं, बल्कि न्याय, गोपनीयता, सेवा, शल्य-ज्ञान और नैतिक उत्तरदायित्व से बनी।
प्राचीन भारत से आरंभ होकर यह कृति उस युग को उद्घाटित करती है जब समाज की प्रतिष्ठा शक्ति से नहीं, बल्कि न्यायपूर्ण आचरण से निर्धारित होती थी। चंद्रवंशी–क्षत्रिय परंपरा, महापद्मनंद का ऐतिहासिक प्रसंग, मौर्यकालीन राज्यदर्शन तथा अशोक के शस्त्र से धम्म तक के रूपांतरण में नाई/सैन समाज की भूमिका को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक स्पष्ट करती है कि नाई केवल सेवा-कर्मी नहीं थे, बल्कि राजकीय विश्वास, चिकित्सा-ज्ञान और सामाजिक संतुलन के वाहक थे।
मध्यकालीन भारत में यह यात्रा संत शिरोमणि सेन जी महाराज की भक्ति-परंपरा तक पहुँचती है, जहाँ सेवा आध्यात्मिक चेतना में रूपांतरित होती है। खालसा परंपरा में भाई साहिब सिंह की ऐतिहासिक उपस्थिति यह दर्शाती है कि सैन समाज केवल सामाजिक ही नहीं, बल्कि राष्ट्रनिर्माण की प्रक्रिया में भी सक्रिय भागीदार रहा है। औपनिवेशिक काल में पहचान के विघटन, जातीय वर्गीकरण और सामाजिक अवमूल्यन की प्रक्रिया को यह पुस्तक तथ्यपरक ढंग से उजागर करती है।
स्वतंत्र भारत में सैन समाज की यात्रा—संघर्ष से पुनर्निर्माण तक—शिक्षा, प्रशासन, न्याय-सेवा और सार्वजनिक जीवन में उभरती उपस्थिति के साथ प्रस्तुत की गई है। राज्य-वार नामों की विविधता, आंतरिक सामाजिक संरचना, गोत्र परंपरा और सामाजिक अनुशासन का विश्लेषण इस कृति को एक गंभीर समाजशास्त्रीय दस्तावेज बनाता है।
परिशिष्टों में संकलित प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों और प्रमुख गोत्रों की सूची इसे अभिलेखीय महत्व प्रदान करती है, साथ ही यह स्पष्ट किया गया है कि यह संकलन सम्मानात्मक और प्रतिनिधिक है, न कि अंतिम दावा।
यह पुस्तक सैन / नाई / सविता समाज के लिए आत्मगौरव और आत्मबोध का ग्रंथ है—और उन सभी पाठकों के लिए भी, जो भारतीय इतिहास को उसके वास्तविक सामाजिक आधारों के साथ समझना चाहते हैं।
यह इतिहास पढ़ने की नहीं, पहचान जाग्रत करने की पुस्तक है।

About the Author

लेखक परिचय

आनन्द कुमार आशोधिया
(कवि, साहित्यिक विश्लेषक, अनुवादक एवं राष्ट्रीय चेतना के संवाहक)
आनन्द कुमार आशोधिया—जिन्हें साहित्यिक जगत में ‘आनन्द शाहपुर’ के नाम से जाना जाता है—अनुशासित सेवा, भाषाई निपुणता और गहरी सांस्कृतिक जड़ों के एक विशिष्ट संगम का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनकी लेखनी में भारतीय इतिहास की सूक्ष्म समझ, छंदों का शास्त्रीय अनुशासन और लोक-संस्कृति की जीवंत परंपरा एक साथ प्रवाहित होती है। उनका साहित्य न केवल काव्यात्मक अभिव्यक्ति है, बल्कि सांस्कृतिक स्मृति और राष्ट्रीय चेतना का सजग दस्तावेज भी है।
सैनिक सेवा और साहित्यिक आधार
भारतीय वायु सेना के पूर्व वारंट ऑफिसर के रूप में उन्होंने 32 वर्षों तक राष्ट्र की सेवा की। इस दीर्घ सेवा-काल में राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार हेतु उनके अनुकरणीय योगदान के लिए उन्हें लगातार आठ वर्षों तक ‘राजभाषा प्रोत्साहन सम्मान’ से सम्मानित किया गया। सैनिक अनुशासन और साहित्यिक साधना का यह समन्वय उनकी वैचारिक स्पष्टता और रचनात्मक दृढ़ता का आधार बना।
अन्नामलाई विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर (M.A.) उपाधि प्राप्त आनन्द जी हिन्दी, हरियाणवी और अंग्रेजी के बीच एक सशक्त भाषाई सेतु के रूप में कार्य करते हैं। अनुवाद, रूपांतरण और पुनर्सृजन के माध्यम से वे भारतीय साहित्य को व्यापक पाठक-समुदाय से जोड़ने का सतत प्रयास करते रहे हैं।
सांस्कृतिक जड़ें और लोक-संवेदना
हरियाणा के सोनीपत जनपद स्थित अपने पैतृक गाँव ‘शाहपुर तुर्क’ से उनका गहरा सांस्कृतिक जुड़ाव है। उनका साहित्यिक नाम ‘आनन्द शाहपुर’ उसी लोक-विरासत के प्रति कृतज्ञता और स्मृति का प्रतीक है। उनकी रचनाओं में गाँव, लोक, स्मृति और सामूहिक चेतना केवल विषय नहीं, बल्कि जीवित अनुभव के रूप में उपस्थित रहती है।
बहुमुखी रचनात्मक संसार
1 अप्रैल को जन्मे और वर्तमान में मुंबई में निवासरत आनन्द जी की साहित्यिक साधना बहुआयामी है। 380 से अधिक रचनाओं के माध्यम से उन्होंने दोहा, छंद, गीत, ग़ज़ल और लघुकथा जैसी विधाओं को समृद्ध किया है। विशेषतः छंदशास्त्र (पिंगल) और लोक-काव्य—विशेषकर हरियाणवी रागनी—पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें समकालीन रचनाकारों में एक विशिष्ट स्थान प्रदान करती है।
प्रमुख साहित्यिक कृतियाँ (चयनित)
महाकाव्य एवं पुनर्पाठ : अथ मार्जरिका उवाच (भारतीय इतिहास का प्रतीकात्मक महाकाव्य), द्रौपदी : एक लोक चेतना
लोक-काव्य : अधराजण (लोक महाकाव्य), अविकावनी (हरियाणवी रागनी संग्रह)
आधुनिक काव्य : थारा मुद्दा थारी बात, प्रेम के सौ रंग
शास्त्रीय समीक्षा : किस्सा भगत पूरणमल एवं हीर राँझा (पिंगल समीक्षा सहित)
अनुवाद एवं ट्रांसक्रिएशन : Saket: An English Trans-creation, Niswarthi Udyoga Parva, Antaryātrā – The Inner Journey, Kahaan Kahaan Paiband Lagau
ऐतिहासिक शोध ग्रंथ : सैन समाज का गौरवशाली इतिहास
सम्मान एवं पुरस्कार
साहित्य और संस्कृति के प्रति उनके सतत योगदान के लिए उन्हें हरियाणा संस्कृति गौरव रत्न अवॉर्ड, कारगिल गौरव विजय सम्मान तथा हरियाणवी साहित्य रत्न (2025) जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत किया गया है।
आनन्द कुमार आशोधिया का रचनात्मक उद्देश्य भारतीय लोक, शास्त्रीय और ऐतिहासिक चेतना को समकालीन संदर्भों में पुनर्पाठित करना है। प्रस्तुत कृति ‘सैन समाज का गौरवशाली इतिहास’ उसी दीर्घ साहित्यिक और सांस्कृतिक संकल्प की परिणति है, जिसमें लोक-स्मृति, ऐतिहासिक विवेक और राष्ट्रीय चेतना एक साथ प्रवाहित होती है।

Book Details

ISBN: 9789356550315
Publisher: Anand Kumar Ashodhiya
Number of Pages: 127
Dimensions: 5.5"x8.5"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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