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हर इंसान की ज़िंदगी में कोई एक नाम ऐसा होता है
जो समय के साथ धुंधला नहीं पड़ता।
चाहे साल बीत जाएँ,
हालात बदल जाएँ,
रिश्ते बदल जाएँ…
लेकिन वो नाम दिल में वैसे ही रहता है।
“जाते हुए लम्हे” उसी एक नाम की कहानी है।
यह कहानी है एक ऐसे प्रेम की
जो कभी पूरा नहीं हुआ,
फिर भी अधूरा होकर भी खत्म नहीं हुआ।
यह सिर्फ़ इंतज़ार की कहानी नहीं है,
यह उस इंसान की यात्रा है
जिसने किसी को इतना चाहा
कि खुद को भूल गया।
सत्रह साल का विरह,
कुछ दिनों की वापसी,
और फिर एक आख़िरी खामोशी।
इस किताब में न कोई खलनायक है,
न कोई आरोप।
यह बस एक दिल की सच्चाई है —
जैसी महसूस हुई, वैसी लिख दी गई।
अगर आपने भी कभी
किसी के लौट आने की उम्मीद में
रातें काटी हैं…
अगर आपने भी कभी
किसी को खोकर भी उसी के लिए दुआ की है…
तो यह कहानी आपको अपनी लगेगी।
“जाते हुए लम्हे”
उन पलों की कहानी है
जो जिए जा सकते थे…
लेकिन इंतज़ार में खो गए।
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