You can access the distribution details by navigating to My Print Books(POD) > Distribution
कुछ कहानियाँ लिखी नहीं जातीं। वे किसी टूटी हुई खिड़की से आती हवा की तरह भीतर उतरती हैं, और शब्दों में ढलने से पहले ही हमारे जीवन का हिस्सा बन जाती हैं। यह उपन्यास भी उसी हवा का एक झोंका है—अनियोजित, अनियंत्रित, और अनिवार्य।
मैंने इसे किसी विचारधारा की सेवा में नहीं लिखा, न ही किसी बाज़ार की माँग के लिए। यह उन प्रश्नों से जन्मा है, जिनका उत्तर जीवन ने कभी स्पष्ट नहीं दिया।
माँ क्या होती है?
माँ का होना किस तरह हमें आकार देता है?
और माँ का न होना किस तरह हमें अधूरा छोड़ देता है?
गौरव की कहानी किसी एक व्यक्ति की नहीं है। यह उन सब की कहानी है, जिनकी माँ थी, पर जीवन में नहीं थी। यह उन रिश्तों की कहानी है, जो मौजूद होकर भी अनुपस्थित रहते हैं—जैसे घर में रखा कोई पुराना दीपक, जो जलता नहीं, पर अंधेरे में अपनी छाया छोड़ता रहता है।
बचपन का यह खालीपन चुपचाप भीतर बैठ जाता है और उम्र भर हमारे निर्णयों को आकार देता रहता है। सांवली सी नेहा का गौरव की जिंदगी में आना उसके जीवन की दरारों को भरने की चेष्टा जैसा था, पर नेहा की मंज़िल कुछ और ही थी। गायत्री गौरव के व्यक्तित्व से प्रभावित होकर नज़दीक आ रही थी, पर गौरव का अपना अधूरापन उसे पूर्णता की तरफ ले जाना चाहता था।
“माँ” केवल एक अस्तित्व नहीं है। वह एक स्मृति है, उसकी अनुपस्थिति है, एक प्रश्न है, और कभी-कभी एक उत्तर भी।
इस पुस्तक में जो कुछ भी है, वह पूरी तरह कल्पना नहीं है, और पूरी तरह आत्मकथा भी नहीं। यह उन भावनाओं का संकलन है, जिन्हें हर इंसान अपने जीवन के किसी मोड़ पर महसूस करता है—पर शब्दों में ढाल ---नहीं पाता।
यदि यह कहानी आपको उदास करे, तो समझिए आपने अपने भीतर किसी सच्चाई को छू लिया है।
यदि यह कहानी आपको सोचने पर मजबूर करे, तो समझिए आपने अपने भीतर किसी प्रश्न को पहचान लिया है।
और यदि यह कहानी आपको किसी को याद दिला दे—तो शायद यही इस पुस्तक का उद्देश्य था।
Currently there are no reviews available for this book.
Be the first one to write a review for the book अधूरा आकाश (a moment of longing).