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अधूरा आकाश (a moment of longing)

(a moment of longing)
Ashok Mahajan
Type: Print Book
Genre: Drama/Play, Parenting & Families
Language: Hindi
Price: ₹302 + shipping
This book ships within India only.
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Description

कुछ कहानियाँ लिखी नहीं जातीं। वे किसी टूटी हुई खिड़की से आती हवा की तरह भीतर उतरती हैं, और शब्दों में ढलने से पहले ही हमारे जीवन का हिस्सा बन जाती हैं। यह उपन्यास भी उसी हवा का एक झोंका है—अनियोजित, अनियंत्रित, और अनिवार्य।
मैंने इसे किसी विचारधारा की सेवा में नहीं लिखा, न ही किसी बाज़ार की माँग के लिए। यह उन प्रश्नों से जन्मा है, जिनका उत्तर जीवन ने कभी स्पष्ट नहीं दिया।
माँ क्या होती है?
माँ का होना किस तरह हमें आकार देता है?
और माँ का न होना किस तरह हमें अधूरा छोड़ देता है?
गौरव की कहानी किसी एक व्यक्ति की नहीं है। यह उन सब की कहानी है, जिनकी माँ थी, पर जीवन में नहीं थी। यह उन रिश्तों की कहानी है, जो मौजूद होकर भी अनुपस्थित रहते हैं—जैसे घर में रखा कोई पुराना दीपक, जो जलता नहीं, पर अंधेरे में अपनी छाया छोड़ता रहता है।
बचपन का यह खालीपन चुपचाप भीतर बैठ जाता है और उम्र भर हमारे निर्णयों को आकार देता रहता है। सांवली सी नेहा का गौरव की जिंदगी में आना उसके जीवन की दरारों को भरने की चेष्टा जैसा था, पर नेहा की मंज़िल कुछ और ही थी। गायत्री गौरव के व्यक्तित्व से प्रभावित होकर नज़दीक आ रही थी, पर गौरव का अपना अधूरापन उसे पूर्णता की तरफ ले जाना चाहता था।
“माँ” केवल एक अस्तित्व नहीं है। वह एक स्मृति है, उसकी अनुपस्थिति है, एक प्रश्न है, और कभी-कभी एक उत्तर भी।
इस पुस्तक में जो कुछ भी है, वह पूरी तरह कल्पना नहीं है, और पूरी तरह आत्मकथा भी नहीं। यह उन भावनाओं का संकलन है, जिन्हें हर इंसान अपने जीवन के किसी मोड़ पर महसूस करता है—पर शब्दों में ढाल ---नहीं पाता।
यदि यह कहानी आपको उदास करे, तो समझिए आपने अपने भीतर किसी सच्चाई को छू लिया है।
यदि यह कहानी आपको सोचने पर मजबूर करे, तो समझिए आपने अपने भीतर किसी प्रश्न को पहचान लिया है।
और यदि यह कहानी आपको किसी को याद दिला दे—तो शायद यही इस पुस्तक का उद्देश्य था।

About the Author

वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता अशोक महाजन ने समाज सेवा, शिक्षा और राजनीति में सक्रिय योगदान दिया है। उनकी पूर्व कृति “जीवन संवाद” (2025) में उनके अनुभवों की झलक मिलती है।
नवीनतम उपन्यास “अधूरा आकाश” में उन्होंने माँ और बेटे के रिश्ते को मनोवैज्ञानिक दृष्टि से परखने का प्रयास किया है। नेहा और गायत्री के माध्यम से यह कथा दिखाती है कि माँ का होना या न होना व्यक्ति के जीवन को किस तरह प्रभावित करता है।
यह संवेदनशील कहानी पाठकों को रिश्तों की गहराई और जीवन के अधूरेपन पर नए दृष्टिकोण से सोचने को प्रेरित करती है।

Book Details

ISBN: 9789356924765
Publisher: Ashok Mahajan
Number of Pages: 275
Dimensions: 5.82"x8.28"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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