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ज़िंदगी कभी पूरी चाय की तरह सुकून देती है, तो कभी उस 'हाफ कप' की तरह रह जाती है जिसे हमने जल्दी में टेबल पर छोड़ दिया था। यह कहानी है सुदीप की, जिसके पास सपने तो बड़े थे, पर वक़्त हमेशा आधा ही मिला। सुदीप की तलाश क्या कभी खत्म होगी? क्या उसे वो सुकून मिलेगा जो एक पूरी प्याली चाय में होता है?
क्या आधा इश्क़, पूरी ज़िंदगी बिताने के लिए काफी होता है? या फिर हम हमेशा उस दूसरे 'हाफ' की तलाश में ही रह जाते हैं? सुदीप के साथ जुड़िए इस भावुक सफ़र में, जहाँ हर घूँट में एक नई याद और हर पन्ने पर एक अधूरी बात छिपी है।
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