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रामदरश मिश्र के उपन्यास : युग-बोध और मूल्य-संक्रमण

युग-बोध और मूल्य-संक्रमण
Dr. Naziya Kamal
Type: Print Book
Genre: Literature & Fiction
Language: English, Hindi
Price: ₹780 + shipping
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Description

रामदरश मिश्र हिंदी साहित्य के उन मूर्धन्य साहित्यकारों में से एक हैं; जिन्होंने आधुनिक युग की पारिवारिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और नैतिक जटिलताओं का न केवल अनुभव किया ; बल्कि अपनी रचनाओं में उन्हें अत्यंत प्रामाणिकता के साथ अभिव्यक्त भी किया है । साहित्य जगत में उनका लेखन केवल उपन्यास विधा तक सीमित नहीं रहा है; बल्कि कविता, कहानी, निबंध , आलोचना, संस्मरण, यात्रा-वृत्तांत इत्यादि क्षेत्र में भी उनकी रचनाओं ने अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज की है ; किन्तु यह कहना भी उचित होगा कि एक उपन्यासकार के रूप में उनका योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा है; क्योंकि उन्होंने अपने उपन्यासों के माध्यम से न केवल ग्रामीण और शहरी भारत का यथार्थ प्रस्तुत किया है ; बल्कि मानवीय मूल्यों और संबंधों की युगानुकूळ एवं तर्कसम्मत नवीन व्याख्याएँ भी प्रस्तुत की हैं। उनके उपन्यासों में अभिव्यंजित भारतीय ग्रामीण- जीवन केवल वर्णनात्मक न होकर अनुभवजन्य और आत्मीयता से परिपूर्ण दिखाई पड़ता है। 'पानी के प्राचीर', 'जल टूटता हुआ', 'सूखता हुआ तालाब', 'अपने लोग', 'आकाश की छत', 'आदमी राग', 'थकी हुई सुबह', 'बीस बरस' और 'परिवार' जैसे उपन्यासों में उन्होंने सामाजिक परिवर्तन, पारिवारिक विघटन, संबंधों के द्वंद्व और मूल्यों के संक्रमण को बड़ी सूक्ष्मता के साथ चित्रित किया है। वर्तमान समय में जब समाज में आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक संकट गहराता जा रहा है ; ऐसे समय में रामदरश मिश्र जैसे साहित्यकार का लेखन एक दिशा-संकेतक की भूमिका निभाता है। उनके उपन्यासों में परंपरा और आधुनिकता के द्वंद्व, मूल्यबोध की टूटन, संबंधों की जटिलताएँ और मनुष्य की संवेदनात्मक चेतना के विविध आयाम उजागर होते हैं।तकनीकी प्रगति ने जहाँ जीवन को आसान बनाया है ; तो वहीं इसने संबंधों में कृत्रिमता, आत्मविस्मृति और नैतिक विचलन भी उत्पन्न किए हैं। ऐसे समय में मिश्र जी के उपन्यासों में निहित संवेदनशील दृष्टिकोण, मानवीय मूल्यबोध और आत्मीय संबंधों की पड़ताल करना न केवल साहित्यिक स्तर पर महत्वपूर्ण है; बल्कि सामाजिक और नैतिक स्तर पर भी अत्यंत उपयोगी है।
रामदरश मिश्र के उपन्यासों में प्रेम, करुणा, विश्वास, आत्मीयता, पारिवारिक बंधन, और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे तत्व स्पष्टतः दृष्टिगोचर होते हैं। वे मानते हैं कि साहित्यकार का कार्य केवल यथार्थ का चित्रण करना नहीं, बल्कि समाज को दिशा देना भी है। यही कारण है कि वे अपने उपन्यासों में न केवल विघटित संबंधों का वर्णन करते हैं; बल्कि संबंधों की पुनर्स्थापना की भी आशा जगाते हैं। उन्होंने अपने उपन्यासों में समय की चुनौतियों को भी बखूबी चित्रित किया है। स्वतंत्रता के बाद की सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियाँ, आर्थिक विषमता, जातिवाद, सांप्रदायिकता, पूँजीवाद, उपभोक्तावाद आदि उनके उपन्यासों में यथोचित रूप में प्रस्तुत हुई हैं। विशेषतः ‘बिना दरवाज़े का मकान’ में उन्होंने महानगरीय जीवन की अमानवीयता और स्त्री की पीड़ा को जिस करुणा और यथार्थबोध के साथ अभिव्यक्त किया है; वह पाठकों को गहरे तक प्रभावित करता है। उनके कथात्मक लेखन का उद्देश्य सामाजिक , सांस्कृतिक एवं राजनीतिक विमर्श को प्रस्तुत करने का भी एक सशक्त माध्यम रहा है। उनके उपन्यासों में केवल समस्याओं का चित्रण नहीं है, बल्कि उनके समाधान की संभावनाएँ भी समाहित हैं। वे निराशा नहीं फैलाते, बल्कि जीवन की संभावनाओं को खोजते हैं। उनका दृष्टिकोण सकारात्मक है—वे टूटते संबंधों के बीच विश्वास की डोर को फिर से जोड़ने का प्रयास करते हैं। यही विशेषता उन्हें एक संवेदनशील, प्रतिबद्ध और दूरदर्शी रचनाकार बनाती है। उनके उपन्यास मानवीय संबंधों की जटिलताओं को न केवल उजागर करते हैं; बल्कि उन संबंधों की संवेदनात्मक पुनर्परिभाषा भी प्रस्तुत करते हैं। उनकी लेखनी में भारतीय समाज की आत्मा बोलती है—एक ऐसी आत्मा जो टूटती नहीं; संघर्ष करती है, विश्वास करती है और अपने मूल्यों के लिए जूझती है।
प्रस्तुत पुस्तक "रामदरश मिश्र के उपन्यास: युग-बोध और मूल्य-संक्रमण" में मिश्र जी के उपन्यासों में निहित युगबोध एवं मूल्य संक्रमण को केंद्र में रखकर उनके उपन्यासों का गहन एवं समयसापेक्ष विश्लेषण करने का मेरे द्वारा एक लघु प्रयास है। इस पुस्तक का उद्देश्य केवल रामदरश मिश्र के उपन्यासों की विषयवस्तु का विश्लेषण करना नहीं है; बल्कि उनके साहित्य में अंतर्निहित मानवीयता, करुणा और नैतिक चेतना की पड़ताल करना भी है। साथ ही यह समझने का भी प्रयास है कि कैसे रामदरश मिश्र ने अपने साहित्य के माध्यम से समाज में व्याप्त अमानवीयता के विरुद्ध मानवीय चेतना की मशाल प्रज्वलित की। यह पुस्तक मिश्र जी के उन्हीं महानतम प्रयासों को रेखांकित करती है ; साथ ही पाठकों एवं अध्ययनकर्ताओं को यह समझने का सुअवसर भी प्रदान करती है कि कैसे साहित्य मनुष्य के परिवारिक एवं सामाजिक जीवन के बीच एक सेतु का कार्य कर सकता है। आशान्वित हूँ कि मेरा यह प्रयास सार्थक सिद्ध होगा।

About the Author

डॉ. नाज़िया कमाल हिंदी साहित्य की एक प्रतिभाशाली और समर्पित अध्येता हैं, इनका जन्म जनपद बहराइच के एक सम्मानित परिवार में हुआ। इनका लेखन समाज और संवेदना के गहन अंतर्संबंधों को उजागर करता है। उनकी नवीन पुस्तक “रामदरश मिश्र के उपन्यास : युग-बोध और मूल्य-संक्रमण” एक वरिष्ठ रचनाकार के माध्यम से समकालीन हिंदी उपन्यासों में यथार्थ, संस्कृति और मानवीय मूल्यों के परिवर्तनशील स्वरूप को उद्घाटित करती है।
डॉ. कमाल ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से “रामदरश मिश्र के उपन्यासों में सामाजिक संबंध और मूल्य” विषय पर पीएच.डी. प्राप्त की। उनके शोध की मौलिकता और दृष्टिकोण की गहराई ने उन्हें साहित्यिक शोध के क्षेत्र में एक सशक्त पहचान दिलाई है। उन्होंने सात शोध-पत्र प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित किए हैं और नौ से अधिक संगोष्ठियों में शोध प्रस्तुत कर अकादमिक विमर्श को समृद्ध किया है।
उन्हें दिग्विजय नाथ स्नाकोत्तर विद्यालय, गोरखपुर द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान उत्कृष्टता समारोह–2024 में “Outstanding Achievement Award” से सम्मानित किया गया, जो उनके कार्य की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति का प्रमाण है।
छात्र जीवन में भी उनका प्रखर बौद्धिक और रचनात्मक योगदान रहा—स्नातक पर सर्वाधिक अंक प्राप्त कर “माजदा असद पुरस्कार” से नवाज़ी गईं, तथा बेगम सुल्तान जहाँ हॉल अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, अलीगढ़ की पत्रिका की संपादक रहीं। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा उन्हें SPM (Student Proctor Monitor) के रूप में नियुक्त किया जाना उनके नेतृत्व गुणों और अनुशासनात्मक सक्रियता को दर्शाता है।
डॉ. नाज़िया कमाल का लेखन सादगी, संवेदना और सच्चाई से भरा है। वे साहित्य को अपने समय और समाज का आईना मानती हैं और अपने हर शब्द में जीवन की गहराइयों को महसूस कराती हैं।

Book Details

ISBN: 9789349567054
Publisher: Bharat Publication House
Number of Pages: 306
Dimensions: 5.5"x8.5"
Interior Pages: B&W
Binding: Hard Cover (Case Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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