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“जन्म देना एक क्षण है, लेकिन जीवन देना एक निरंतर यात्रा।”
‘जन्मदाता से जीवनदाता’ माता-पिता के उस अनकहे सफ़र को शब्दों में पिरोती है, जिसमें वे केवल बच्चे को जन्म ही नहीं देते, बल्कि अपने संस्कार, समय, त्याग और प्रेम से उसके जीवन का निर्माण करते हैं। यह पुस्तक माता-पिता की भूमिका, उनकी ज़िम्मेदारियों, भावनाओं और संघर्षों को सरल एवं संवेदनशील भाषा में प्रस्तुत करती है।
पुस्तक का उद्देश्य माता-पिता को यह समझने में सहायता करना है कि बदलते समय में बच्चों की परवरिश केवल अनुशासन नहीं, बल्कि समझ, संवाद और भावनात्मक जुड़ाव की भी मांग करती है। इसमें दिए गए विचार और उदाहरण माता-पिता को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करते हैं और बच्चों के साथ एक सकारात्मक, भरोसेमंद संबंध बनाने का मार्ग दिखाते हैं।
यह पुस्तक हर उस माता-पिता के लिए उपयोगी है जो अपने बच्चों के लिए केवल जन्मदाता नहीं, बल्कि सच्चे अर्थों में जीवनदाता बनना चाहते हैं।
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