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सबसे पहले मैं अपने ईष्ट देव एवं दादाजी-दादीजी को नमन करता हूँ जिन्होंने आज मेरा एक और सपना पूर्ण करवाया है !
मेरी यह प्रथम पुस्तक मेरे पिता एवं माता को समर्पित है !
मेरे जीवन पर, मेरे व्यव्हार पर, मेरे कर्म पर, मेरे रोम रोम पर, मेरे माँ व् पिताजी का अमिट असर है ! मेरे माता पिता ने हर प्रस्थिति में अपनी गृहस्थी को ईमानदारी के साथ जिया है, वो किसी से अपेक्षा नहीं रखते है, वो किसी से भेदभाव नहीं रखते है, मेरे माता पिता इस कलयुग में बेदाग सामाजिक जीवन, परिपुर्ण परिवारिक छवि लिए हुवे निरन्तर आगे बढ़ रहे है और हमें भी आगे बढ़ा रहे है ! वो मुझे ही नहीं बल्कि पुरे परिवार को आशा के सुत्र में में बांधे रखते है ! मेरे माता पिता धर्म, कर्म, संघर्षमय एवं सरल जीवन जीने की प्रेरणा देते है !
माता पिता के इसी तरह के उच्च विचारों से, संस्कारी पहरो से,...
Re: मंजुषा (e-book)
Great collection of hindi poems. It have romantic, on nature, social messages in sweet tone. The theme of the book is great. All the writings are in very simple language...