You can access the distribution details by navigating to My pre-printed books > Distribution
प्राणायाम भारतीय योग परंपरा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है जो केवल श्वास नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन ऊर्जा के नियमन, मन की शुद्धि, और आध्यात्मिक उन्नति का सशक्त माध्यम है। "प्राण" और "आयाम" इन दो शब्दों से मिलकर बना प्राणायाम शब्द गहन दार्शनिक अर्थ रखता है। प्राण का अर्थ केवल श्वास नहीं, बल्कि वह सूक्ष्म जीवन शक्ति है जो समस्त चेतना और क्रियाशीलता का आधार है। आयाम का अर्थ है विस्तार, नियंत्रण या आयाम देना।
प्राचीन ऋषियों ने प्राणायाम को अष्टांग योग का चौथा अंग माना है, जो यम, नियम और आसन के बाद आता है और धारणा, ध्यान तथा समाधि की ओर ले जाता है। यह शारीरिक स्वास्थ्य और आध्यात्मिक जागृति के बीच सेतु का कार्य करता है। यह आलेख प्राणायाम के दार्शनिक आधार, वैज्ञानिक पक्ष, व्यावहारिक विधियों और आधुनिक संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
Currently there are no reviews available for this book.
Be the first one to write a review for the book प्राणायाम का दार्शनिक एवं व्यावहारिक स्वरूप: एक समग्र अध्ययन.