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प्राणायाम का दार्शनिक एवं व्यावहारिक स्वरूप: एक समग्र अध्ययन (eBook)

Type: e-book
Genre: Education & Language
Language: Hindi
Price: ₹0
Available Formats: PDF

Description

प्राणायाम भारतीय योग परंपरा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है जो केवल श्वास नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन ऊर्जा के नियमन, मन की शुद्धि, और आध्यात्मिक उन्नति का सशक्त माध्यम है। "प्राण" और "आयाम" इन दो शब्दों से मिलकर बना प्राणायाम शब्द गहन दार्शनिक अर्थ रखता है। प्राण का अर्थ केवल श्वास नहीं, बल्कि वह सूक्ष्म जीवन शक्ति है जो समस्त चेतना और क्रियाशीलता का आधार है। आयाम का अर्थ है विस्तार, नियंत्रण या आयाम देना।
प्राचीन ऋषियों ने प्राणायाम को अष्टांग योग का चौथा अंग माना है, जो यम, नियम और आसन के बाद आता है और धारणा, ध्यान तथा समाधि की ओर ले जाता है। यह शारीरिक स्वास्थ्य और आध्यात्मिक जागृति के बीच सेतु का कार्य करता है। यह आलेख प्राणायाम के दार्शनिक आधार, वैज्ञानिक पक्ष, व्यावहारिक विधियों और आधुनिक संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है।

About the Authors

डॉ. जयप्रकाश कंसवाल
विभागाध्यक्ष
योग विज्ञान विभाग

श्री देव सुमन
उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय
परिसर ऋषिकेश

Book Details

ISBN: 9789347142581
Publisher: AgniLeaf
Number of Pages: 13
Availability: Available for Download (e-book)

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प्राणायाम का दार्शनिक एवं व्यावहारिक स्वरूप: एक समग्र अध्ययन

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