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प्रस्तुत शोधपरक आलेख में आयुर्वेद के मूलभूत सिद्धान्त त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) के संतुलन में योगाभ्यास की भूमिका का व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। आधुनिक वैज्ञानिक अनुसन्धान पद्धतियों के माध्यम से यह प्रदर्शित किया गया है कि विशिष्ट योगासन, प्राणायाम एवं ध्यान तकनीकें शारीरिक, मानसिक एवं जैव-रासायनिक स्तरों पर दोष संतुलन में सहायक हैं। यह अध्ययन प्राचीन भारतीय चिकित्सा विज्ञान और आधुनिक शरीर क्रिया विज्ञान के बीच एक सेतु स्थापित करता है।
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