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पटना वाली बस: तीन सफ़र, एक समाज (eBook)

Type: e-book
Genre: Literature & Fiction
Language: Hindi
Price: ₹99
(Immediate Access on Full Payment)
Available Formats: PDF, EPUB

Description

शीर्षक: पटना वाली बस: तीन सफ़र, एक समाज

लेखक: पथिक

क्या एक बस की यात्रा सिर्फ दूरी तय करती है, या यह एक पूरे समाज की बदलती तस्वीर दिखाती है?"पटना वाली बस" महज़ तीन कहानियों का संग्रह नहीं, बल्कि बिहार की मिट्टी से उपजी वह सच्चाई है जिसे अक्सर हेडलाइन्स में जगह नहीं मिलती। लेखक 'पथिक' ने सुपौल से पटना की एक ही बस यात्रा के दौरान उन तीन चेहरों को शब्द दिए हैं, जो हमारे समाज के तीन अलग-अलग पड़ावों का प्रतिनिधित्व करते हैं।इस ई-बुक के भीतर आप पाएंगे:बचपन की हार: माधव और मुनिया की मार्मिक दास्तां, जो वक़्त से पहले अपनी मासूमियत खोकर एक अनचाहे सफ़र पर निकल पड़े हैं।पलायन का दर्द: लखन और उसके साथियों के संघर्ष की कहानी, जो अपने घर-परिवार के प्रेम को एक झोले में बंद कर, रोटी के लिए 'परदेसी' होने की मजबूरी ढो रहे हैं।उम्मीद की किरण: दो शिक्षकों का वह संवाद, जहाँ बनारस का स्वाद और कमतौल की सादगी मिलकर एक बेहतर भविष्य और शिक्षा का पुल बनाती है।

यह किताब क्यों पढ़ें?

अगर आप समाज के यथार्थवाद (Realism) और मानवीय संवेदनाओं को करीब से महसूस करना चाहते हैं, तो यह लघु संग्रह आपके दिल को छुएगा। यह किताब हमें सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम वास्तव में आगे बढ़ रहे हैं या हमारी जड़ें अभी भी मजबूरी की बेड़ियों में जकड़ी हैं।एक छोटा सफ़र, जो आपके सोचने का नज़रिया बदल देगा।

About the Author

"पथिक" समकालीन हिंदी साहित्य की वह आवाज़ हैं जो समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति की पीड़ा और आशा को अपनी लेखनी का आधार बनाते हैं। बिहार की ज़मीनी हकीकत और लोक-संवेदनाओं से गहराई से जुड़े पथिक का मानना है कि सबसे बेहतरीन कहानियाँ वातानुकूलित कमरों में नहीं, बल्कि धूल भरी सड़कों और भीड़भाड़ वाली बसों में मिलती हैं।
उनकी कहानियों में शब्दों का आडंबर नहीं, बल्कि यथार्थ की वह खनक है जो पाठक को सोचने पर मजबूर कर देती है। एक सजग रचनाकार के रूप में पथिक ने 'पटना वाली बस' के ज़रिए पलायन, शिक्षा और बचपन के संघर्षों का जो सजीव चित्रण किया है, वह उन्हें आज के दौर के संवेदनशील कथाकारों की श्रेणी में खड़ा करता है। उनकी कलम सिर्फ़ मनोरंजन नहीं करती, बल्कि व्यवस्था और समाज के सामने एक ज़रूरी सवाल भी रखती है।

Book Details

Number of Pages: 15
Availability: Available for Download (e-book)

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पटना वाली बस: तीन सफ़र, एक समाज

पटना वाली बस: तीन सफ़र, एक समाज

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