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एक चिड़ी थी, एक निविड़ था (eBook)

स्वतःस्फूर्त कविताओं का संकलन
Type: e-book
Genre: Poetry
Language: Hindi
Price: ₹200
(Immediate Access on Full Payment)
Available Formats: PDF

Description

गुरुदत्त की प्रसिद्ध फिल्म ‘प्यासा’ का नायक – विजय – एक शायर है लेकिन उसके अपने ही भाई उसकी कविताओं का मोल नहीं आँक पाते और उसकी हस्तलिखित कविताओं का पुलिन्दा किसी रद्दी वाले के यहाँ धेले के भाव बेच आते हैं। विजय किस्मत वाला था कि उसकी कविताओं की पांडुलिपि पर गुलाबो नाम की एक तथाकथित ‘वेश्या’ की निगाह पड़ती है जिसे शेरो-शायरी से प्रेम है, और वह रद्दी वाले से वह संकलन प्राप्त कर लेती है। लेकिन हर कवि, हर शायर, इतना खुशकिस्मत नहीं होता कि उसे कोई गुलाबो मिल ही जाए। कविता मन की एक स्वतःस्फूर्त अभिव्यक्ति है और इस दृष्टि से हर कोई कवि है क्योंकि हर हृदय में भावनाओं के ज्वार उठते हैं। अंतर बस इतना है कि कुछ लोग उस अभिव्यक्ति को सुन्दर शब्दों, अलंकारों, भावों की गहराइयों और आकर्षक छंदों में बांध देते हैं, और बहुत से लोग ऐसा नहीं कर पाते। बचपन और युवावस्था सुन्दर भावों और कविताओं के प्राकट्य के बसन्त-काल हैं। इस संकलन की कविताएँ मेरी 500 से भी अधिक कविताओं के भंडार से बची-खुची और स्मृतियों में अंकित कुछ गिनी-चुनी कविताएँ हैं। एक चिड़ी थी, एक निविड़ था ऐसी ही एक कविता है जो प्रेम और कर्तव्य के बीच फँसे मेरे जीवन की ही एक दास्तान है किंतु इस संकलन में और भी अनेक कविताएँ हैं जो आपको अच्छी लगेंगी ... क्योंकि उन्हें दिल से लिखा गया है, केवल कलम से नहीं। उन कविताओं में कहीं प्रेम की मधुरता भी है और कहीं उसकी वेदना भी। उनमें विद्रोह भी है और समर्पण भी। मुझे पूरा विश्वास है कि ये कविताएँ आपके भीतर छिपी ‘गुलाबो’ को कवि की भावनाओं के रंग-बिरंगे पटल से प्रेम करने में सक्षम बनाएँगी।

About the Author

श्री सुनीति चंद्र मिश्र किशोरावस्था से ही कविताएं, कहानियां, उपन्यास तथा अन्य उपयोगी पुस्तकें लिखते आ रहे हैं। मिथिला विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य (प्रतिष्ठा) में स्नातक करने के बाद, उन्होंने कई विद्यालयों में हिंदी एवं अंग्रेजी भाषाओं के शिक्षक के रूप में सेवा दी। बाद में बहाई धर्म में महाद्वीपीय सलाहकार मंडल (एशिया) के ग्वालियर कार्यालय में ऑफिस सेक्रेटरी के पद पर नियुक्त हुए। उसी दौरान, वे भारत के बहाइयों की राष्ट्रीय आध्यात्मिक सभा, नई दिल्ली, की अनुवाद समिति के सदस्य बने जो कि वे आज भी हैं। बहाई धर्म-प्रवर्तक, बहाउल्लाह की परम पवित्र पुस्तक ‘किताब-ए-अकदस’, लॉवेल जॉन्सन लिखित ‘दि कवनेंट’ और एच.एम. बाल्युजी लिखित ‘दि बाब: दि हेराल्ड ऑफ दि डे ऑफ डेज’ सहित उन्होंने अनेक बहाई एवं गैर-बहाई पुस्तकों का अनुवाद किया है। उन्होंने बहाई धर्म की सर्वोच्च संस्था – विश्व न्याय मंदिर – और साथ ही अंतर्राष्ट्रीय बहाई समुदाय के अनेक संदेशों और वक्तव्यों का भी अनुवाद किया है।

श्री मिश्र ने लगभग दो वर्षों तक ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ अंग्रेजी दैनिक के मध्य प्रदेश कार्यालय में फ़ीचर एडिटर के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं। वर्तमान में वे ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, भारत, यू.के. और यूएसए की प्रतिष्ठित अनुवाद एजेन्सियों और व्यक्तिगत क्लाइंटों के लिए अनुवाद सेवा प्रदान कर रहे हैं। उनकी प्रकाशित पुस्तकें – ‘डिड आइ एक्ज़िस्ट बिफोर ऐंड विल आइ बि बॉर्न अगेन?’ (www.pustakmahal.com) तथा ‘ए राइटर्स मैनुअल’ (www.vspublishers.com) लोकप्रिय हैं। इसके अलावा, उनके अनेक ई-बुक्स इस वेबसाइट पर उपलब्ध हैं: www.smashwords.com

Book Details

Number of Pages: 45
Availability: Available for Download (e-book)

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एक चिड़ी थी, एक निविड़ था

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