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शब्दों की कड़ाही से (eBook)

काव्य कोष
Type: e-book
Genre: Poetry
Language: Hindi
Price: ₹51
Description of "शब्दों की कड़ाही से"

कहते हैं " जहाँ न पहुंचे रवि, वहां पहुंचे कवि"।
मैं पहुंचा हूँ या नहीं, ये तो पाठकगण बताएँगे ।
पर सोशल मीडिया पर मेरी कविताओं को अद्भुत सराहना मिली है, जिसके लिए मैं अपने पाठकगणों का आभारी हूँ।
कुछ पाठकगणों ने मेरी कविताओं की तुलना गुलज़ार जी की कविताओं से की है मैं उनका भी आभारी हूँ ।
मेरी कवितायेँ यदि किसी एक व्यक्ति के मन को भी छू गई हों तो मैं स्वयं को धन्य मानूंगा ।

Kehte hain " Jahan Na pahunche Ravi, vahan pahunche kavi"

Main pahuncha hoon ya nahin, ye to Pathak gan batayenge.

Par social media par meri kavitaon ko adbhut sarahna mili hai, jiske liye main apne Pathak ganon ka abhari hoon.
Kuch Pathak ganon ne meri kavitaon ki tulna Gulzar ji ki kavitaon se ki hai. Main unka bhi abhari hoon.
Meri kavitayen yadi kisi ek vyakti ke man ko bhi choo gai hon to main swayam ko dhany manoonga.

About the author(s)

सुभाष सहगल एक जाने माने फिल्म मेकर हैं.पूना फिल्म इंस्टिट्यूट से फिल्म संपादन का
डिप्लोमा गोल्ड मैडल के साथ हासिल करने के बाद लगभग २५० फिल्मों का संपादन कर चुके हैं
.तीन फिल्मों को राष्ट्रीय पुरुस्कार भी प्राप्त हुआ है.फिल्मफेयर अवार्ड विजेता हैं.लगभग
११ फिल्म पुरुस्कार जूरीस में बतौर मेंबर रह चुके हैं.गुलज़ार के साथ एक धारावाहिक भी बना चुके हैं
.दो फिल्मों का निर्माण/निर्देशन भी कर चुके हैं.कविता लिखना उनकी हॉबी है।

Book Details
Publisher: POTHI
Number of Pages: 200
Availability: Available for Download (e-book)
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