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Type: e-book
Genre: Religion & Spirituality
Language: Hindi
Price: ₹100
(Immediate Access on Full Payment)
Available Formats: PDF

Description

स्वस्तिक प्रतिक अत्यंत प्राचिन प्रतिक हैं जीसका उदभव आर्य संस्क्रुति और आर्य धर्मसे माना जाता हैं । स्वस्तिकको प्रतिकोंका विश्वगुरु माना जाता हैं क्युंकी मानव उत्पत्तिका ये सर्व प्रथम चिन्ह हैं । हजारों वर्षोंसे स्वस्तिका प्रतिक ही एक ऐसा प्रतिक हैं जो विश्वव्यापी और विश्वमें सर्वमान्य हैं । स्वस्तिक प्रतिकका उपयोग विश्वके सारे खंडोमे पाया गया हैं । मानव जातीके ये सर्वप्रथम प्रतिकका उपयोग पुरातन युगोंसे ही हर संस्क्रूति, सभ्यता और धर्मोंमें प्रत्यक्ष या परोक्ष रूपसे होता आया हैं । स्वस्तिक विश्वकी हर मानवजातीका अत्यंत प्राण प्रिय प्रतिक है क्युंकी स्वस्तिक चिन्हको पुरातन कालसे ही एक आध्यात्मिक, शुभकारी, लाभकारी पुण्यकारी और मौक्षदायी प्रतिकके रूपमें आदरणीय, सन्माननीय और पूजनीय माना गया हैं । स्वस्तिकको पश्चिमी देशोमें प्रेम, प्रकाश, जीवन और सौभाग्यका चिन्ह भी माना जाता हैं । विश्वकी सर्वप्रथम मानव संस्क्रुति आर्यसंस्कृति और आर्यधर्म या सनातनधर्मसे लेकर मायन, यहुदी, एझटेक, इन्का, पेगन, ताओ, शींतो, क्रिश्चियन, इस्लाम जैसे अन्य धर्मों और...

About the Authors

श्री हेंमंतकुमार गजानन् पाध्याका जन्म पूर्वेय मुंबई राज्यके थाणे जिल्ले और् हालके गुजरात राज्यके पारसीओंके ऐतिहासीक स्थल संजान बंदरके पास खत्तलवाडा गांवमें हुआ था । सुरतकी पी.टी. सायन्स कालीजमें अभ्यास करके उन्होंने दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालयसे रसायन और भौतिकशास्त्रमें स्नातककी पदवी प्रथम वर्गंमें उत्तिर्ण होके प्राप्तकी थी । पश्च्यात उन्होंने हाफकीन ईंस्टीट्युट ओफ रीसर्च एन्ड बायोफार्मास्युटीकल्स, परेल,मुम्बईमें अभ्यास करनेके बाद पोलीमर टेक्नोलोजीकी अनुस्तानतककी पदवी युनिवर्सीटी ओफ आस्टन ईन् बर्मिंगहामसे प्राप्त करने केलीए १९७६में ईंग्लंड आये थे । परदेशमें आगमनके बाद अभ्यासके साथ् साथ उन्होंने आर्य धर्म, संस्कृति, परमपरा और मातृभाषाको जीवंत और ज्वलंत बनानेके अभियानमें अपना अमूल्य योगदान भी प्रदान किया । ईंग्लंडकी कुछ स्थानिक संस्थाओंके संस्थापक् प्रमुख और् अन्य राष्ट्रीय और आंतर राष्ट्रीय संस्थाओंके सदस्यभी हैं । उन्होंने १९९५ में हिंदु स्वातंत्र्यवीर स्मृति संस्थाम् नामकी संशोधन संस्थाकी शरुआतकी और सात दशकसे जिनिवामें पडे हुए गुजरातके सर्वप्रथम क्रांतिकारी स्वातंत्र्यवीर पंडित श्यामजी कृष्णवर्मा और् उनकी पत्नी भानुमतीजीके अस्थीकुंभोको भारत भेजनेके कार्यमें...

Book Details

Number of Pages: 88
Availability: Available for Download (e-book)

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स्वस्तिकगंगा

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