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ALIBABA (eBook)

Type: e-book
Genre: Mystery & Crime
Language: Hindi
Price: ₹150
(Immediate Access on Full Payment)
Available Formats: PDF

Description

राहुल सिंह जब विदेश से अपने देश लौटा, तो उसकी यह वापसी किसी विजय यात्रा की तरह नहीं थी।

उसके पिता, हरदेव सिंह, देश के सबसे प्रभावशाली मीडिया समूह में से एक के मालिक थे। ऐसा मीडिया जो सत्ता का आईना नहीं, बल्कि उसका कवच बन चुका था। सच अगर सत्ता के खिलाफ़ जाता, तो उसे या तो तोड़-मरोड़ दिया जाता था या फिर पूरी तरह दफ़ना दिया जाता था। यही कारण था कि राहुल सिंह यह देश छोड़ गया था। उसने विदेश में एक ऐसे मीडिया हाउस में काम किया, जहाँ सवाल पूछना अपराध नहीं था और सच को कीमत नहीं चुकानी पड़ती थी।

लेकिन अब हालात बदल चुके थे। पिता की तबीयत लगातार बिगड़ रही थी। डॉक्टरों की आवाज़ में उम्मीद कम और औपचारिकता ज़्यादा थी। राहुल समझ गया था यह बुलावा सिर्फ़ बेटे के लिए नहीं था, उत्तराधिकारी के लिए भी था। कुछ ही दिनों बाद हरदेव सिंह चले गए।

पिता की चिता ठंडी भी नहीं हुई थी कि बोर्डरूम की राजनीति गर्म होने लगी थी। वही चेहरे, वही मुस्कानें, वही सौदे। राहुल ने सोचा था कि वह व्यवस्था बदलेगा। उसने संपादकीय बैठकों में सवाल उठाए, रिपोर्ट्स को रोका, कुछ फाइलें खुलवाईं। लेकिन बहुत जल्दी उसे यह एहसास हो गया कि यहाँ सच की कीमत बहुत भारी है।

उसने देखा था, जो लोग सिस्टम से टकराने की कोशिश करते हैं, वे या तो झुक जाते हैं या टूट जाते हैं। कुछ मीडिया हाउस दिवालिया हो चुके थे, कुछ मालिक रहस्यमय चुप्पी में चले गए थे। यह लड़ाई बाहर से नहीं जीती जा सकती थी।

राहुल ने तब एक फैसला लिया, सबसे कठिन और सबसे ख़तरनाक फैसला। अगर शेर को हराना है, तो पहले उसके साथ चलना होगा।

राहुल अब अलीबाबा बन चुका था, चोरों की गुफ़ा में मौजूद, उन्हीं में से एक, लेकिन उनकी हर चाल पर नज़र रखता हुआ। बाहर से सत्ता का समर्थक, भीतर से उसका सबसे ख़तरनाक विरोधी।

क्योंकि उसे पता था, इस देश में अब सच चीखकर नहीं, फुसफुसाकर ज़िंदा रहता है।
और यह कहानी उसी फुसफुसाहट से शुरू होती है।

About the Author

पाठकों के लिए नोट

यह मेरी पहली उपन्यास रचना है, और मुझे पूरी उम्मीद है कि यह कहानी आपको रोचक और मनोरंजक लगे। चूँकि यह मेरा पहला प्रयास है, इसलिए हो सकता है कि यह पूरी तरह से आपकी अपेक्षाओं पर खरा न उतरे। मैंने इसे तैयार करने में अपनी पूरी मेहनत और ध्यान लगाया है ताकि यह अपने उद्देश्य को पूरा कर सके।
एक लेखक के लिए पाठकों की प्रतिक्रिया अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। इसलिए मैं आपसे विनम्र अनुरोध करता हूँ कि यदि आपने पुस्तक पढ़ ली है, तो कृपया अपने विचार और सुझाव मुझे ईमेल के माध्यम से साझा करें। आपके फीडबैक से मुझे अपने लेखन में सुधार करने और भविष्य में और बेहतर साहित्य प्रस्तुत करने में सहायता मिलेगी।
आपकी प्रतिक्रिया और समर्थन के लिए धन्यवाद।

अजीत सिंह
Email: filmyajeet@gmail.com

Book Details

Number of Pages: 260
Availability: Available for Download (e-book)

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