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हम ऐसे समय में जी रहे हैं जहाँ तकनीक पहले से कहीं अधिक तेज़, स्मार्ट और शक्तिशाली हो चुकी है।
आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस जवाब देता है, निर्णय आसान बनाता है और जीवन की रफ़्तार बढ़ा देता है—
लेकिन इसी गति के बीच एक प्रश्न चुपचाप खड़ा रहता है:
मैं कौन हूँ?
मौन की ओर बढ़ता भविष्य AI के युग में इंसान बने रहने की एक शांत, गहरी और मानवीय मार्गदर्शिका है।
यह पुस्तक न तो तकनीक का विरोध करती है और न ही कोई त्वरित समाधान बेचती है।
यह आपको केवल एक उपहार देती है—थोड़ी देर रुकने का साहस।
यह पुस्तक ध्यान को किसी अभ्यास की तरह नहीं, बल्कि जीवन को देखने की एक नई दृष्टि के रूप में प्रस्तुत करती है।
जहाँ श्वास, शरीर और मौन मिलकर हमें फिर से अपने केंद्र की ओर लौटने का मार्ग दिखाते हैं।
जब मशीनें सीख रही हैं,
तब इंसान को स्वयं को समझना होगा।
जब गति बढ़ रही है,
तब ठहराव की आवश्यकता और भी गहरी हो जाती है।
यह पुस्तक आपको बेहतर बनाने का वादा नहीं करती।
यह आपको आपके पास वापस लाने का निमंत्रण देती है।
यदि इस पुस्तक को पढ़ते हुए आप कहीं रुक जाएँ,
कहीं शांत हो जाएँ,
या अपने ही भीतर झाँक लें—
तो यही इसकी सफलता है।
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