You can access the distribution details by navigating to My pre-printed books > Distribution

Add a Review

मौन की ओर बढ़ता भविष्य (eBook)

AI के युग में इंसान, ध्यान और स्वतंत्र चेतना की मानवीय मार्गदर्शिका
Type: e-book
Genre: Religion & Spirituality, Theology
Language: Hindi
Price: ₹149
(Immediate Access on Full Payment)
Available Formats: PDF

Description

हम ऐसे समय में जी रहे हैं जहाँ तकनीक पहले से कहीं अधिक तेज़, स्मार्ट और शक्तिशाली हो चुकी है।
आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस जवाब देता है, निर्णय आसान बनाता है और जीवन की रफ़्तार बढ़ा देता है—
लेकिन इसी गति के बीच एक प्रश्न चुपचाप खड़ा रहता है:
मैं कौन हूँ?

मौन की ओर बढ़ता भविष्य AI के युग में इंसान बने रहने की एक शांत, गहरी और मानवीय मार्गदर्शिका है।
यह पुस्तक न तो तकनीक का विरोध करती है और न ही कोई त्वरित समाधान बेचती है।
यह आपको केवल एक उपहार देती है—थोड़ी देर रुकने का साहस।

यह पुस्तक ध्यान को किसी अभ्यास की तरह नहीं, बल्कि जीवन को देखने की एक नई दृष्टि के रूप में प्रस्तुत करती है।
जहाँ श्वास, शरीर और मौन मिलकर हमें फिर से अपने केंद्र की ओर लौटने का मार्ग दिखाते हैं।

जब मशीनें सीख रही हैं,
तब इंसान को स्वयं को समझना होगा।
जब गति बढ़ रही है,
तब ठहराव की आवश्यकता और भी गहरी हो जाती है।

यह पुस्तक आपको बेहतर बनाने का वादा नहीं करती।
यह आपको आपके पास वापस लाने का निमंत्रण देती है।

यदि इस पुस्तक को पढ़ते हुए आप कहीं रुक जाएँ,
कहीं शांत हो जाएँ,
या अपने ही भीतर झाँक लें—
तो यही इसकी सफलता है।

About the Author

अशोक वाढेल एक चिंतनशील लेखक हैं, जिनकी रुचि मानवीय चेतना, ध्यान, मौन और आधुनिक तकनीक—विशेष रूप से आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस—के आपसी संबंधों के अध्ययन में है। उनका लेखन तेज़ी से बदलती तकनीकी दुनिया में मानव होने के अर्थ पर एक शांत, संतुलित और व्यावहारिक दृष्टि प्रस्तुत करता है।

अशोक वाढेल का लेखन किसी विचारधारा या सिद्धांत को थोपने का प्रयास नहीं करता, बल्कि पाठक को स्वयं से जुड़ने, प्रश्न करने और भीतर की स्पष्टता को अनुभव करने के लिए आमंत्रित करता है। उनकी रचनाएँ तकनीक और चेतना के बीच संघर्ष नहीं, बल्कि सह-अस्तित्व और समझ का मार्ग दिखाती हैं।

मौन की ओर बढ़ता भविष्य के माध्यम से वे पाठकों को रुकने, देखने और महसूस करने का स्थान देते हैं—ताकि तेज़ होती दुनिया में भी मानवता, करुणा और आंतरिक स्वतंत्रता बनी रह सके।

Book Details

Publisher: Ashok Vadhel
Number of Pages: 99
Availability: Available for Download (e-book)

Ratings & Reviews

मौन की ओर बढ़ता भविष्य

मौन की ओर बढ़ता भविष्य

(Not Available)

Review This Book

Write your thoughts about this book.

Currently there are no reviews available for this book.

Be the first one to write a review for the book मौन की ओर बढ़ता भविष्य.

Other Books in Religion & Spirituality, Theology

Shop with confidence

Safe and secured checkout, payments powered by Razorpay. Pay with Credit/Debit Cards, Net Banking, Wallets, UPI or via bank account transfer and Cheque/DD. Payment Option FAQs.