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Dara shikoh jivan Darshan aur Rachnayen (eBook)

Dara shikoh life and Achievement
Type: e-book
Genre: Biographies & Memoirs
Language: Hindi
Price: ₹300
(Immediate Access on Full Payment)
Available Formats: PDF

Description

डॉo मौo फ़ारूक़ ख़ान की पुस्तक 'शहजादा दारा शिकोह-जीवन और दर्शन'
पुस्तक सार (Abstract)
दारा शिकोह का जीवन परिचय और सूफी व्यक्तित्व :- मुहम्मद दारा शिकोह (1615-1659 ईस्वी) मुगल सल्तनत के सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली शहजादे थे। बादशाह शाहजहाँ ने उन्हें अपना वली अहद
(उत्तराधिकारी) नियुक्त किया था और उन्हें हिन्दुस्तान का भावी बादशाह बनाना चाहते थे। विपरीत परिस्थितियों और भाइयों के बीच हुए गृह-युद्ध (खानाजंगी) के कारण, दारा शिकोह राजसिंहासन से वंचित रह गये, लेकिन इतिहास में उनका नाम एक महान और विचारशील व्यक्ति के रूप में अमर है। दारा शिकोह का उल्लेख किये बिना हिन्दुस्तान का इतिहास कभी पूर्ण नहीं हो सकता। उनकी शख्सियत में दो विपरीत गुण समाहित थे। एक ओर, वह शासन के कार्यों में अत्यन्त कुशल और पारंगत थे और दूसरी ओर उनका स्वभाव एक सूफ़ीयाना इंसान का था। वह सदैव आध्यात्मिक ज्ञान (तसव्वुफ़) की यात्रा में लीन रहते थे और सूफी संतों तथा विद्वानों का अत्यधिक आदर-सम्मान करते थे।
दारा शिकोह की महानता केवल इसलिए नहीं है कि वह मुगल शहजादे थे, बल्कि इसलिए है कि वह भारतीय संस्कृति और सभ्यता के सच्चे प्रतिनिधि तथा संरक्षक थे। उन्होंने सभी धर्मों में निहित गुणों और मूल्यों को समझने का प्रयास किया, जिससे समाज में सामुदायिक सद्भाव (समाजी हम-आहंगी) की स्थापना हो सके। इस भावना ने उन्हें हर धर्म के महत्वपूर्ण ग्रंथों और शख्सियतों का गहन अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया।
दारा शिकोह का दर्शन और साहित्यिक योगदान :- दारा शिकोह का जीवन भौतिक सुखों से परे, आत्मा की खोज पर केंद्रित था। इस पुस्तक में इस मौलिक विचार पर प्रकाश डाला गया है कि भौतिक प्रगति के बावजूद मनुष्य क्यों असंतुष्ट और अशान्त है। दारा शिकोह का दर्शन यह मानता है कि मानव शरीर में निवास करने वाली आत्मा 'ईश्वर की आत्मा' का अंश है और जब तक यह आत्मा अपने मूल स्रोत से नहीं मिल जाती, तब तक वास्तविक शान्ति असम्भव है। यह विचार ही उनके सम्पूर्ण आध्यात्मिक मार्ग का आधार था।
दारा शिकोह मुगल वारिसों में अद्वितीय एवं विशिष्ट स्थान रखते हैं। वह केवल एक कवि, लेखक, चित्रकार और अनुवादक ही नहीं थे, बल्कि तसव्वुफ़ (सूफीवाद) और अध्यात्म के भी एक महान विद्वान थे। उन्होंने लगभग 18 पुस्तकें और ग्रन्थ लिखे हैं। उनकी प्रसिद्ध कृतियों में सूफी संतों की जीवनियाँ जैसे 'सफ़ीना-तुल-औलिया' और 'सकीनत-उल-औलिया' शामिल हैं। उनकी सबसे महत्वपूर्ण रचना 'मज्म-उल-बहरेन' (दो सागरों का संगम) है, जो इस्लामी और भारतीय आध्यात्मिक विचारों के बीच एकता और समन्वय को समर्पित है। दारा शिकोह की सबसे बड़ी इल्मी (शैक्षणिक) सेवा हिन्दू धर्मग्रंथों का अनुवाद है। उन्होंने 50 उपनिषदों का फारसी में अनुवाद 'सिर्र-ए-अकबर' ('महान रहस्य') के नाम से करवाया। इसके अलावा, उन्होंने भगवद गीता और योगवाशिष्ठ का भी फारसी भाषा में अनुवाद किया। यह पुस्तक दारा शिकोह के इन विचारों और कार्यों को उनके पारिवारिक और सामाजिक परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करती है।
पुस्तक का महत्व और विशिष्ट विचारकों का सहयोग :- यह पुस्तक डॉo फारूक खान द्वारा लिखित है और दारा शिकोह के जीवन, उनके सूफी दर्शन और सामाजिक सद्भाव के उनके सन्देश को वर्तमान समाज के लिए प्रासंगिक बनाती है।
इस कृति का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है कि इसकी प्रस्तावना (Foreword) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ नेता श्री इन्द्रेश कुमार जी ने बहुत विस्तार से लिखी है। उन्होंने पुस्तक की सामग्री और लेखक डॉo फारूक खान के शोध-कार्य की अत्यधिक प्रशंसा (तारीफ़) की है। श्री इन्द्रेश कुमार जी का यह सहयोग इस बात को पुष्ट करता है कि दारा शिकोह का फालसफ़ा किसी एक समुदाय तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सम्पूर्ण राष्ट्र की साझा सांस्कृतिक विरासत का प्रतिनिधित्व करता है।
इसके अतिरिक्त, इस पुस्तक में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के पूर्व कुलपति (Ex VC) प्रोफेसर तारिक मंसूर साहेब ने अपने बहुमूल्य विचार लिखे हैं। साथ ही, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की वर्तमान कुलपति (Current VC) प्रोफेसर नईमा खातून ने भी अपने विचार साझा किये हैं।
अमन और भाईचारे का संदेश :- निष्कर्ष
पुस्तक यह निष्कर्ष देती है कि दारा शिकोह का जीवन और दर्शन आज के समय में भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना 17वीं शताब्दी में था। आज, जब समाज में वैचारिक मतभेद और सामाजिक तनाव व्याप्त है, दारा शिकोह द्वारा प्रचारित 'अमन और भाईचारा' (शान्ति एवं बन्धुत्व) के दर्शन की अत्यधिक आवश्यकता है।
प्रोफेसर नईमा खातून ने विशेष रूप से अपने विचारों में दारा शिकोह के जीवन और दर्शन को अमन और भाईचारे के लिए अत्यन्त आवश्यक बताया है। यह इस बात को स्थापित करता है कि यह पुस्तक केवल ऐतिहासिक जानकारी का संग्रह नहीं है, बल्कि सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता के लिए एक मार्गदर्शक भी है। दारा शिकोह ने बादशाह अकबर द्वारा स्थापित मानवता और भाईचारे की नींव को आगे बढ़ाया था।
यह पुस्तक हमें उस महान शहजादे की कहानी बताती है, जिनकी शालीनता, उदारता और धार्मिक समन्वय की भावना आज भी प्रेरणादायक है। यह उन सभी पाठकों के लिए एक अनिवार्य अध्ययन है जो भारत की मिश्रित संस्कृति, सूफीवाद के मर्म और धर्मों के बीच वास्तविक समन्वय को समझना चाहते हैं। यह कृति हमें याद दिलाती है कि राजसिंहासन से अधिक महत्वपूर्ण है ज्ञान, साहित्य, कला और दर्शन की मशाल को प्रज्वलित करना, जिसकी रोशनी सदियों तक नफरत और पक्षपात को दूर कर सकती है।

About the Author

लेखक परिचय
​डॉ. मो. फ़ारूक़ ख़ान का जन्म जनपद बहराइच के ग्राम करीमनगर में हुआ। अपनी प्रारंभिक शिक्षा के उपरांत उन्होंने प्रतिष्ठित अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) से बी.ए., बी.एड., एम.ए. एवं पी.एच.डी. की उच्च शैक्षणिक उपाधियाँ प्राप्त कीं।
​वर्ष 2012 में उनकी नियुक्ति एम.एस. इंटर कॉलेज, सिकंदराबाद (बुलंदशहर) में हुई। अध्यापन के दायित्वों के साथ-साथ वे निरंतर शैक्षणिक, साहित्यिक एवं सामाजिक गतिविधियों में संलग्न रहते हैं। अब तक उनकी 6 महत्वपूर्ण कृतियाँ प्रकाशित होकर चर्चा का विषय बन चुकी हैं। अपनी शोध यात्रा के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद (NCPUL), नई दिल्ली के अंतर्गत दो महत्वपूर्ण शोध परियोजनाओं (Research Projects) को सफलतापूर्वक पूर्ण किया है। उनकी साहित्यिक सेवाओं के सम्मान स्वरूप उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी एवं अन्य प्रतिष्ठित संस्थाओं ने उन्हें विभिन्न पुरस्कारों से अलंकृत किया है। देश की प्रतिष्ठित एवं मानक पत्र-पत्रिकाओं में उनके शोधपरक लेख निरंतर प्रकाशित होते रहते हैं।
​डॉ. मो. फ़ारूक़ ख़ान का व्यक्तित्व बहुआयामी है। वे न केवल एक गंभीर साहित्यकार हैं, बल्कि सामाजिक सरोकारों में भी अत्यंत सक्रिय रहते हैं। उनकी लेखन शैली और बौद्धिक गहराई का प्रत्यक्ष प्रमाण विभिन्न विषयों पर आधारित उनकी ये कृतियाँ हैं:
​प्रमुख कृतियाँ:
​उर्दू का ज़िंदानी अदब (Urdu Ka Zindani Adab)
​इंक़लाब बग़ावत और उर्दू अदब (Inquilab Baghavat Aur Urdu Adab)
​निशाने ग़ालिब (Nishan-e-Ghalib)
​तारीख़-ए-अदब-उर्दू (Tarikh-e-Adab-e-Urdu)
​साइंसदां शायर: शांति स्वरूप भटनागर (Sciencedan Shayer: Shanti Swarup Bhatnagar)
​ दारा शिकोह: जीवन और दर्शन (Sultan Dara Shikoh: Jeevan Aur Vichardhara)
​लेखक का नंबर: 7906439860
इज़हार अहमद नदीम

Book Details

ISBN: 9789366913858
Publisher: Akhar Publishers Delhi
Number of Pages: 269
Availability: Available for Download (e-book)

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