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प्रस्तुत नाटक समस्या प्रधान अछि। मैथिल समाज आ वृहत रूपमे भारतीय समाजमे जाति-पाति तँ छइहे, निष्ठावान कर्मनाथ अपन बेटीक बिआह बिनु दहेजक करता तइ क्रममे दीर्घ कथोपकथनक माध्यमसँ ई देखौल गेल अछि।
कथा मूलतः मिथिलाक धरतीक उपज अछि। आ ई खाली मिथिलाक नहि, भारतवर्षक समस्या अछि। नाटक विधामे ई कमजोर भलेँ देखा पड़ए मुदा कथोपकथन समाजिक विरुपताकेँ निरुपित करबामे सक्षम अछि।
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