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“प्यार ही बदले की आग – भाग 2: प्यार ही महायुद्ध” एक ऐसी कहानी है जहाँ व्यक्तिगत दर्द और बदले की आग अब एक बड़े संघर्ष में बदल चुकी है। डॉ. ओम कृष्णा और डॉ. तनिशा ने सोचा था कि उनकी लड़ाई खत्म हो चुकी है और जीवन अब शांति की ओर बढ़ चुका है। लेकिन सच इतना आसान नहीं था।
देश के कई शहरों में अचानक बढ़ते रहस्यमयी अपराध, हिंसक घटनाएँ और छिपी हुई साजिशें यह संकेत दे रही थीं कि कहीं न कहीं एक शक्तिशाली और गुप्त संगठन काम कर रहा है। एक ऐसा संगठन जो व्यवस्था को भीतर से कमजोर करना चाहता है और पूरे समाज को अराजकता की ओर धकेल रहा है।
जब आर्यन प्रताप नाम का एक रहस्यमयी व्यक्ति ओम कृष्णा के सामने एक नई सच्चाई लेकर आता है, तब उन्हें एहसास होता है कि यह केवल एक अपराध की कहानी नहीं है—यह एक बड़े महायुद्ध की शुरुआत है।
अब दांव केवल कुछ लोगों की जिंदगी नहीं, बल्कि पूरे देश का भविष्य है।
सच, न्याय और विश्वास के लिए यह लड़ाई पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक और जटिल होने वाली है।
इस कहानी में रहस्य, थ्रिल, भावनात्मक संघर्ष और गहरी मानवीय संवेदनाएँ एक साथ जुड़ती हैं। यह उपन्यास यह सवाल भी उठाता है कि क्या प्यार केवल एक भावना है, या वह इतनी शक्तिशाली ताकत है जो सबसे बड़े संघर्ष को भी बदल सकती है।
“प्यार ही महायुद्ध” केवल एक थ्रिलर नहीं है, बल्कि यह साहस, विश्वास और सच्चाई के लिए खड़े होने की कहानी है—जहाँ अंततः सबसे बड़ी ताकत नफरत नहीं, बल्कि प्यार बनकर उभरती है।
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