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आज की दुनिया में ध्यान की कमी किसी व्यक्तिगत कमजोरी का संकेत नहीं है।
यह उस वातावरण की स्वाभाविक प्रतिक्रिया है, जो लगातार हमें विचलित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
ध्यान ही पर्याप्त है एक शांत, व्यावहारिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है—
जो आपको यह समझने में मदद करती है कि
आपका फोकस क्यों टूटता है,
इच्छाशक्ति क्यों थक जाती है,
और अनुशासन क्यों भारी लगने लगता है।
यह पुस्तक आपको ज़बरदस्ती बदलने की कोशिश नहीं करती।
यह आपको अपने दिमाग के साथ सहयोग करना सिखाती है।
इस पुस्तक में आप जानेंगे:
• क्यों ध्यान टूटना आपकी गलती नहीं है
• कैसे आधुनिक तकनीक और सूचना-बाढ़ ध्यान को खंडित करती है
• इच्छाशक्ति पर निर्भर हुए बिना अनुशासन कैसे बनाया जाए
• बिना डिजिटल डिटॉक्स या कठोर नियमों के फोकस कैसे लौटे
• गहराई से पढ़ना, सोचना और रचना फिर से कैसे संभव हो
• तकनीक के साथ एक शांत और संतुलित संबंध कैसे बनाया जाए
यह पुस्तक उत्पादकता बढ़ाने के लिए नहीं,
बल्कि मन को फिर से रहने योग्य बनाने के लिए लिखी गई है।
अगर आप:
• पढ़ते समय ध्यान खो देते हैं
• काम शुरू करने में कठिनाई महसूस करते हैं
• लगातार थके हुए लेकिन असंतुष्ट रहते हैं
• भीतर से अधिक शांति और स्पष्टता चाहते हैं
तो यह पुस्तक आपके लिए है।
ध्यान को ज़ोर से वापस नहीं लाया जाता।
उसे सुरक्षा, समझ और कोमल निरंतरता से लौटाया जाता है।
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