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कल आज और कल” केवल एक पुस्तक नहीं है, यह समय के तीनों कालों में फैली हुई मानव जीवन की सच्चाइयों का दर्पण है। यह पुस्तक भूत की जड़ों, वर्तमान की उलझनों और भविष्य की आशंकाओं को एक साथ रखकर मनुष्य को स्वयं से प्रश्न करने के लिए मजबूर करती है।
इस ग्रंथ में लेखक ने समाज, सत्ता, युद्ध, लालच, प्रेम, पीड़ा, स्त्री, पुरुष, बच्चा, राजा और मजदूर जैसे जीवन के विविध पात्रों के माध्यम से यह दिखाने का प्रयास किया है कि समय बदलता है, पर मनुष्य की प्रवृत्ति लगभग वही रहती है। गाँव से शहर तक, भारत से विश्व तक, हर स्थान पर जीवन की मूल सच्चाइयाँ एक जैसी दिखाई देती हैं।
यह पुस्तक उपदेश नहीं देती, बल्कि घटनाओं, कथाओं और यथार्थ के माध्यम से पाठक को सोचने पर विवश करती है। यहाँ समाधान नहीं थोपे गए हैं, बल्कि जीवन को समझने की दृष्टि दी गई है।
“कल आज और कल” उन पाठकों के लिए है जो सतही शब्दों से आगे बढ़कर जीवन की गहराइयों को समझना चाहते हैं, जो सच से भागते नहीं बल्कि उसका सामना करने का साहस रखते हैं।
यह किताब पढ़ने के बाद शायद आप वही न रहें जो पढ़ने से पहले थे।
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