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मेरे भीतर विचारों का एक अनंत सैलाब उमड़ता रहता है। मैं अक्सर लिखता हूँ, ताकि उन जज्बातों को शब्द दे सकूँ जो भीतर कहीं दबे होते हैं। मेरी बातें आपको बोझिल न लगें, इसलिए मैंने इस बार कविताओं का सहारा लिया है—ताकि भावनाओं का संदेश सीधे आपके हृदय तक पहुँच सके।
आइए, एक सवाल के साथ इस यात्रा की शुरुआत करते हैं। मेरे साथ चलिए और इस जहान की उन कड़वी और मीठी सच्चाइयों (वास्तविकता) को करीब से देखिए जो शायद अब तक ओझल थीं।
घबराइए मत, हौसला रखिए और पूरी ताकत से कहिए— "डर किस बात का?"
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