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हर रिश्ते में एक वक्त ऐसा आता है, जब बातें कम और गलतफहमियाँ ज़्यादा हो जाती हैं।
यह किताब उन ही पलों की कहानी है—जहाँ “मैं” हमेशा गलत ठहराया गया, और “तुम” हमेशा सही।
इन कविताओं में वो एहसास हैं जो ज़ुबान से नहीं निकल पाए,
वो दर्द है जो मुस्कराहटों के पीछे छिपा रहा,
और वो सवाल… जो आज भी जवाब तलाश रहे हैं।
“हमेशा तुम सही, मैं गलत क्यों” —
एक कविता संग्रह, उन दिलों के लिए जो प्यार में हार गए,
पर सच्चाई में अब भी ज़िंदा हैं।
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