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“यमदूत का मतलब जानती ही हो तुम …” इस बार खान साहब की वाणी में उत्तेजना व्याप्त हो चुकी थी। शायद उन्हें पत्नी के द्वारा दूसरी बार ‘ऑपरेशन यमदूत’ का मतलब पूछा जाना बिल्कुल अच्छा नहीं लगा था।
“जिस व्यक्ति या प्राणी के पास यमदूत पहुँच जाता है, उसे दुनिया को अलविदा कहना पड़ता है … उसकी मृत्यु हो जाती है!” खान साहब की साँसों की गति तेज होने लगी थी। वे उत्तेजना में तेजी से चाय की आखिरी घूँट पीकर कप सेंटर टेबल पर रख दिए और उठ खड़े हुए। फिर पत्नी की आँखों में आँखें डालते हुए बोले, “मतलब यह कि दो नम्बर का गैर कानूनी धंधा करने वाले व्यापारी, स्मगलर, और क्रिमिनल्स अपनी करतूतें तुरन्त बन्द कर दे, वरना जो पकड़ा जायेगा तो पुलिस की फर्जी मुठभेड़ में मारा जायेगा!”
“फर्जी मुठभेड़! यह क्या कह रहे हैं आप?” पति की बात सुन कर विस्मय से श्रीमती खान पति के चेहरे पर कत्थक कर रहे रहस्यमय भावों को पढ़ने की प्रयत्न करने लगीं, “क्या पुलिस लोगों को जिन्दा पकड़ लेने के बाद उसे गोली मार देगी? … क्या जनता की रक्षा करने वाली पुलिस उन्हीं पर इतना बड़ा जुल्म करेगी?”
“सलमा, इसे जनता पर जुल्म करना मत कहो … यह तो सबक है क्रिमिनल्स और गैर कानूनी धंधा करने वाले स्मगलरों और व्यापारियों के लिए … यदि हम एडमिनिस्ट्रेशन वाले कड़ाई से पेश नहीं होंगे तो लोग ‘लॉ एण्ड आर्डर’ का मखौल बना कर रख देंगे!”
“यदि एक कलेक्टर की बीवी की आँखों से मैं न देखूँ तो मेरा अनुभव आपके विपरीत जाएगा … एक आम आदमी की नजर से मेरी आँखें देखती हैं कि एडमिनिस्ट्रेशन वालों ने ही अपनी शेखी बघाड़ने की खातिर कानूनी अधिकार का नाजायज इस्तेमाल कर ‘लॉ एण्ड आर्डर’ का मखौल बना दिए हैं …” श्रीमती खान स्पष्ट और दृढ़ स्वर में कह रही थी, “क्या आपको पता नहीं है कि किसी मुजरिम को सजा देना सिर्फ अदालत का काम है और अदालत के काम को अपने हाथ में लेना एडमिनिस्ट्रेशन वालों के लिए भी गैर - कानूनी है!”
“कानूनी और गैर - कानूनी बातों का उतना अधिक ख्याल रखेंगे तो हम शासन कैसे करेंगे?” खान साहब ने मुँह बना कर ऐसे कहा मानो उनकी पत्नी बिल्कुल नादानी भरी बातें कर रही हो। “पहले तुम ये सोचो कि फर्जी मुठभेड़ में मरने के लिए क्रिमिनल्स यहाँ बैठा रहेगा या फिर पड़ौसी जिलों में भाग खड़ा होगा?”
“माने कि यहाँ से क्रिमिनल्स के भाग खड़े होने पर चाहे पड़ौसी जिलों का क्राइमग्राफ क्यों न ऊपर चढ़ने लगे, परन्तु इस जिला में आपराधिक वारदात में अवश्य कमी होगी …”
“बिल्कुल ठीक समझ रही हो तुम …” खान साहब अपनी प्राण - प्यारी बेगम की समझदारी को थोड़ा और स्पष्ट करते हुए बोले, “क्योंकि जब यहाँ पेशेवर क्रिमिनल्स मौजूद नहीं होंगे तो भला यहाँ क्राइम कौन करेगा?”
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