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नई सोच नई उड़ान - कविता का माला by कमलेश झा कविता माला पापा एक याद

कविता माला पापा एक याद all in one
kamlesh jha
Type: Print Book
Genre: Poetry, Entertainment
Language: English, Hindi
Price: ₹263 + shipping
This book ships within India only.
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Description of "नई सोच नई उड़ान - कविता का माला by कमलेश झा कविता माला पापा एक याद"

नई सोच नई उड़ान हिंदी कविता माला एक ऐसा संग्रह है जिसमें जीवन की सच्चाई ,समाज की खाई ,सामाजिक विषमता, राजनीतिक कुरीति, भ्रष्टाचार, सैनिक का सम्मान, वीरगाथा ,पूर्वजों का कृत्य, इन सभी को समाहित करते हुए यह आपके हाथ में गागर में सागर भरने का भरपूर प्रयास किया गया है
इसे सुने, मनन करें, और अपना कमेंट अवश्य दें,

About the author(s)

Brief Introduction
Kamlesh Jha was born in a simple family in Nagarpara village under Bhagalpur district of Bihar province. His father was a teacher, his primary education was in his village and nearby school, then he went to Muzaffarpur in Bihar province for higher education. Along with this, he did technical graduation (Electronics), then came to Delhi in search of livelihood and he remained through
Delhi only. He received his Master in Business Administration (MBA) and was busy with his livelihood, he never had much to do with literature, but at different stages of his life he had to write something at some point, that turn came when his father Died and thoughts came in full and only then came the writing in his hand and the poem garland which is present in front of you is the result of that and which is now a
new thought and a new flight.
It is presented in the form of a book in front of you.
Contact--Kamlesh jha - 9990891378
Kamleshjha1378@gmail.com

संक्षिप्त परिचय
कमलेश झा जी का जन्म बिहार प्रांत के भागलपुर जिला अंतर्गत नगरपारा ग्राम में एक साधारण से परिवार में हुआ l इनके पिताजी शिक्षक थे प्रारंभिक शिक्षा इनका गांव और आसपास के ही स्कूल में हुआ फिर उच्च शिक्षा के लिए यह बिहार प्रांत के मुजफ्फरपुर में गए इन्होंने साइंस के साथ-साथ टेक्निकल ग्रेजुएशन किया फिर रोजी रोजगार के तलाश में दिल्ली अये और दिल्ली के ही होकर रह गए इन्होंने आगे की शिक्षा मास्टर इन बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन() हासिल किया और अपने रोजी रोजगार में लगे रहे इनका साहित्य से बहुत ज्यादा कभी वास्ता नहीं रहा, लेकिन जीवन के विभिन्न पड़ाव पर कभी ना कभी कुछ ना कुछ लिखते रहे , वह मोड़ तब आया जब इनके पिताजी का निधन हुआ और विचारो का सैलाब सा आया और उसके बाद ही इनके हाथ में लिखनी आई और जो कविता माला आपके सामने उपस्थित है यह उसी का परिणाम है ,और जो अब एक नई सोच और नई उड़ान के साथ

Book Details
Publisher: kamlesh jha
Number of Pages: 205
Dimensions: 5.5"x8.5"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)
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