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मोही नैय्यर का कहना है कि 'जीवन कर्म क्षेत्र है' और 'ये कर्म क्षेत्र संघर्ष क्षेत्र भी है' जीवन में संघर्ष केवल इस सृष्टि में ही नहीं अपितु अन्तरमन में भी होते रहते हैं. ये संघर्ष कभी किसी गज़ल, किसी गीत, अथवा किसी रूबाई के रूप में अवतरित हुए. उनमें से कुछ 'महक' में संकलित हैं.
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