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यह कहानी िकसी िकताब के िलए नहीं, ब
हर उस िदल के िलए
िलख रही ँ जो आज भी “माँ” श सुनकर भर आता है।
ोंिक
म जानती ँ —
माँ होना सबसे बड़ा े म है,पर सबसे गहरी परी ा भी।
अगर इस कहानी ने आपके भीतर कहीं कोई तार छेड़ा,
तो बस इतना समिझए —
आपने भी अपने भीतर की “माँ” को महसूस िकया है। और अगर
आपने यह िकताब अपनी माँ के पास रख दी,तो यही मेरी सबसे
बड़ी जीत होगी।
Pooja Batra
(लेखका, “माँ होना”)
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